आगरालीक्स…आगरा आए मुंबई, जयपुर और दिल्ली से देश में जीन और स्टेम सेल थैरेपी पर रिसर्च कर रहे एक्सपर्ट्स बोले कैंसर सहित लाइलाज बीमारियों के इलाज की उम्मीद जागी है, बेकार अंग पुनर्जीवित भी हो सकते हैं.

आगरा में इंडियन सोसायटी ऑफ एस्थेटिक एंड रीजनरेटिव मेडिसिन (इनसर्ग) की लुक इन टू द फ्यूचर कॉन्फ्रेंस कई मायनों में खास थी। इससे लाइलाज बीमारियों के इलाज की उम्मीद भी जागी है। देश भर में जीन और स्टेम सेल थैरेपी पर शोध कर रहे एक्सपर्ट्स ने अचंभित करने वाली बातें बताईं। स्टेम सेल थेरेपी से निकट भविष्य में करीब 60 तरह की लाइलाज बीमारियों का सफल इलाज हो सकेगा। इस दिशा में हाल की उपलब्धियों और भविष्य के सपने व चुनौतियों पर एक्सपर्ट्स ने कई ऐसी बातें बताईं जिनसे आशाओं को पंख लगे हैं।

मुंबई के टाटा मैमोरियल सेंटर से आए डॉ. गौरव नरूला ने बताया कि स्टेम सेल थैरेपी मेडिसिन क्षेत्र में एक तेजी से विस्तार करने वाली शाखा है, क्योंकि हम गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए उन्हें चुनिंदा रूप से संशोधित, विस्तारित और पुनर्व्यवस्थित करना सीखते हैं, जिन्हें अब तक लाइलाज माना जाता था या नाउम्मीदी के साथ इलाज किया जाता था। इसमें आनुवांशिक रूप से संशोधित टी सेल्स का उपयोग कैंसर को लक्षित करने के लिए किया जा सकता है। मुंबई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और टाटा मैमोरियल के एक संयुक्त शोध की मानें तो सेल ल्यूकेमिया और लिम्फोमास पर निर्देशित एक स्वेदशी रूप से विकसित सीएआर टी सेल उत्पाद अब टीएमसी में नैदानिक परीक्षणों से गुजर रहा है। इससे कई और सेल थैरेपी विकसित करने का रास्ता खुल गया है। चिकित्सा के इस तेजी से घूमते और रोमांचित क्षेत्र में अगला कदम उठाने के लिए अब हमारे पास बुनियादी ढांचा, क्षमता, तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञों का समूह है। कई अन्य केंद्र भी विभिन्न रूपों में सेल और जीन थैरेपी का अनुसरण कर रहे हैं, हम इसे तेजी से भारत में उपचार का हिस्सा बनाने के लिए तैयार हैं।

महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, जयपुर में मेडिकल ओंकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. हेमंत मल्होत्रा ने बताया कि 10 से 15 फीसद तक कैंसर जेनेटिक हो सकते हैं। ब्रेस्ट कैंसर के लिए यह रिस्क 50 से 80 जबकि ओवेरियन कैंसर के लिए यह रिस्क 30 से 40 फीसद तक हो सकता है। इसके लिए ब्रेका वन, ब्रेका टू जांचें कराई जाती हैं। म्यूटेशन मिलने पर परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच कराई जाती है ताकि इसकी आनुवांशिकता का पता लग सके। परिवारीजनों को काउंसलिंग के लिए तैयार किया जाता है। हॉलीवुड सेलिब्रिटी एंजेलिना जॉली के केस में भी यही हुआ था। उन्हें जब कैंसर की आनुवांशिक मौजूदगी का पता लगा तो उन्होंने बिना किसी बीमारी के ही अपने दोनों ब्रेस्ट रिमूव करा दिए, बाद में इन्हें री कंस्ट्रक्ट कराया।
इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ स्टेम सेल एंड रीजनरेटिव मेडिसिन के डॉ प्रभु मिश्र ने कहा कि हम शरीर के उन ऊतकों और अंगों को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम कर रहे हैं जो बीमारी या जन्मजात विकृतियों के कारण बेकार हो गए हैं। स्टेम सेल में यह अद्भुत क्षमता होती है। यह थेरेपी तमाम मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है।