आगरालीक्स…आगरा में डॉक्टर की असल जिन्दगी से परिचय कराएगी शैडोज ऑफ व्हाइट. आगरा के माइक्रोसर्जन डॉ. अनुज की पुस्तक शैडोज ऑफ व्हाइट का विमोचन
धरती पर भगवान माने जाने वाले एक डॉक्टर के पवित्र सफेद कोट पर भी क्या कुछ परछाईयां हैं। कुछ अश्वेत दाग हैं। बाहर से देखने पर सब कुछ बहुत पाक साफ नज़र आता है। परन्तु भीतर झांकने पर एक और ही तस्वीर उजागर होती है, जो मलिन है, क्लिष्ट है, एवम् वीभत्स है। एक डॉक्टर के जीवन की इस सच्ची तस्वीर को अपने शब्दों से उकेरने और एक रूप देने का प्रयास किया है आगरा के माइक्रोसर्जन डॉ. अनुज कुमार ने अपनी पुस्तक शैडोज ऑफ व्हाइट में। जिसका विमोचन आज लिट आगरा के तत्वावधान में होटल होली-डे-इन में किया गया।
पुस्तक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए डॉ. राकेश भाटिया, कमिश्नर एनफोर्समेंट संदीप सिंह व डॉ. अनुज ने मेडिकल कालेज लाइफ से लेकर प्रैक्टिस में आने तक के सफर पर चर्चा की। डॉ. अनुज ने कहा कि एक यह उपन्यास ही नहीं बल्कि एक नवयुवक डाक्टर की मेडिकल कालेज की जीवन यात्रा है, जो सत्य घटनाओं व अनुभवों पर आधारित है। स्कूल से निकला एक अठारह वर्षीय युवक जब मेडिकल कालेज की दहलीज़ पर कदम रखता है तो उसके कुछ और ही अरमान होते हैं, दिल एक पतंग की माफिक आकांशाओं -महत्वाकांशाओं के नीले आसमान पर उड़ान भर रहा होता है। परंतु अनदेखे सपने कुछ और ही तस्वीर लेकर प्रस्तुत होते हैं और उस युवक पर तरह-तरह से भावनात्मक व शारीरिक आघात-प्रतिघात करते हैं। पांच वर्ष के लम्बे अंतराल में यह युवक अपनी ही सोच व अंतर कलह झेलते हुए मेडिकल के अच्छे-बुरे माहौल तथा वहाँ घटित विभिन्न घटनाओं से व्यक्तिगत तौर पर रूबरू होता है। वह यह समझ नहीं पता कि क्या सही है और क्या गलत है।
‘हिपोक्रेटिक ओथ’ जिसको लेकर वह मेडिकल प्रोफेशन में प्रवेश करता है, कभी सही लगती है, कभी सब मिथ्या। इंसानियत कभी सुखांत प्रतीत होती है, और कभी-कभी दुखांत और झूठ । सारे अनुभव एक परछाईं की तरह युवक डाक्टर के सफेद कोट पर उजागर होते हैं और भट्टी में तपे सोने की तरह उसके व्यक्तित्व व कौशल को चमकदार व बेशकीमती बनाते है। डॉ. अनुज ने कहा कि लेखन एक नित कर्म नहीं, बल्कि एक एहसास है, एक संवेदनशील क्रिया है जिसमें लेखक अपना दिल निकाल कर रख देता है और आत्मा से रूबरू हो जाता है। यही एक उत्कृष्ट भाव है और वास्तविक लेखन है। मंचासीन अतिथियों में वरिष्ठ अस्थीरोग विशेषज्ञ आईए खान, डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा, डॉ. ब्रजेश चंद्रा, डॉ. अपर्णा पोद्दार, डॉ. नीलम मल्होत्रा थे। संचालन निधि लाल व अदिति अनुज व धन्यवाद ज्ञापन सौरभ ने दिया।