आगरालीक्स… आगरा में सर्दियों की सौगात गजक-रेबड़ी की कीमतें इस बार बढ़ गई हैं। मेवा की गजक से लेकर गुड़ की कुटैमा गजक तक पर असर। जानिये कारण भी।
आगरा की गजक की क्वालिटी व स्वाद सबसे बेहतर

आगरा में सर्दियों में गजक-रेबड़ी की खासी डिमांड रहती है। गजक और रेबड़ी बनाने के कारीगर में भी यहां अच्छी किस्म की गजक और रेबड़ी बनाते हैं।
मुरैना से भी मंगवाई जाती है गजक

इसके अलावा मुरैना में भी सर्दियों में गजक का बड़ा पैमाने पर कार्य होता है, जहां से यहां पर थोक में गजक मंगाई जाती है। लोगों का कहना है कि मुरैना से आने वाली गजक में अब पहली जैसी क्वालिटी नहीं रही है।
आगरा के कारीगरों की गजक का स्वाद लाजवाब
आगरा के नूरी दरवाजा सहित कई स्थानों पर सर्दियों में गजक और रेबडी बनाने का काम शुरू हो जाता है। बडे दुकानदार अपने यहां के ही कारीगरों से मेवा, पिस्ते की गजक बनवाते हैं, जबकि छोटे दुकानदार स्थानीय कारीगरों के यहां से बनी गजक-रेबड़ी खरीदते हैं, जिनका स्वाद और क्वालिटी अपने आप में अलग होती है।
मेवा गजक से लेकर कुटैमा, गुड़-मूंगफली की भी डिमांड
मेवा गजक में काजू, पिस्ते लगे होते हैं और इसमें अच्छे किस्म के तिल का इस्तेमाल किया जाता है। घी की गजक, पट्टी वाली गजक, गुड़ की गजक, रोल गजक, कुटैमा गजक, गुड़ की मूंगफली की गजक, गुड़ लाई की गजक, गोंद गजक समेत अन्य किस्म की गजक हैं।
तिल की कीमतों में तेजी से बढ़े दाम

फुलट्टी बाजार में खुद गजक बनाकर बेचने वाले पिंटू ने बताय कि हम तो खुद गजक बनाते हैं लेकिन इस बार मजदूरी बढ़ने के साथ तिल महंगा हो गया है। मेवा और घी के दाम बढ़ने का असर भी गजक पर पड़ा है। इस वजह से पिछले साल मिलने वाली गुड़ की कुटैमा गजक जो 180 रुपये किलो मिलती थी, वह अब 220 रुपये प्रति किलो हो गई है। इसी प्रकार गुड़ की रोल वाली वाली गजक 240 रुपये प्रतिकिलो हो गई है। चीनी वाली घी की गजक चार सौ से पांच सौ रुपये प्रति किलो है।
रेबड़ी आगरा के साथ लखनऊ की भी हैं मशहूर
उन्होंने बताया कि बड़ी दुकानों पर आठ सौ से लेकर एक हजार रुपये प्रतिकिलो तक की गजक बाजार में है। इस बार तिल की कीमतों में खासा इजाफा हुआ है। इस वजह से रेबडी की कीमतों में इजाफा हुआ है। आगरा की रेबड़ी मशहूर है लेकिन लखनऊ में सबसे ज्यादा किस्म की रेबड़ी मिलती हैं, जिन्हें बाहर से मंगवाया जाता है।