आगरालीक्स…जिम करते समय अचानक अटैक आया और डेथ हो गई…इस “सडन कार्डियक डेथ” से कुछ दिन पहले शरीर देता है संकेत, बस इन्हें न करें नजरअंदाज
- जैसा भगवान ने दिया, वैसा ही हृदय बना रही नई थेरेपी: पद्मश्री डॉ. बलबीर सिंह
- सांस फूले या छाती में लगे भारीपन तो सीनियर सिटीजन्स ईको का स्क्रीनिंग टेस्ट अवश्य कराएं: डॉ. रजनीश कपूर
- कांफ्रेंस में मिले ज्ञान से देश के लाखों ह्रदय रोगी होंगे लाभान्वित: डॉ. सुवीर गुप्ता
हृदय रोग के क्षेत्र में मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है। अब सीआरटी यानी कार्डियक रिसिंक्रनाइजेशन थेरेपी और सीसीपी यानी कार्डियक कंडक्शन सिस्टम पेसिंग द्वारा हृदय की इलेक्ट्रिकल कंडक्शन को वैसा ही बना दिया जाता है जैसा कि भगवान ने प्रदान किया था.. यह जानकारी कार्डियोलॉजी में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए वर्ष 2007 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित डॉ. बलबीर सिंह (मैक्स हॉस्पिटल, दिल्ली) ने रविवार को होटल डबल ट्री बाय हिल्टन में आगरा इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी सोसाइटी द्वारा आयोजित दो दिवसीय नेशनल कान्फ्रेंस कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 3.0 के समापन पर देशभर से उपस्थित 300 चिकित्सकों के समक्ष प्रदान की। डॉक्टर बलवीर सिंह ने बताया कि हृदय के इलेक्ट्रिकल कनेक्शन में बदलाव आने से हृदय फेल हो जाता है। अगर हम हृदय के इलेक्ट्रिकल कनेक्शन को पेसमेकर और नयी थेरेपी से सही कर दें तो हृदय फिर स्वस्थ हो जाता है।

इस ज्ञान से होगा रोगों का तीव्र निदान..
नेशनल कांफ्रेंस के आयोजन एवं साइंटिफिक सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने समापन पर सभी का आभार जताते हुए कहा कि दो दिवसीय कांफ्रेंस में विशेषज्ञों से प्राप्त ज्ञान से न केवल देश के हजारों चिकित्सक लाभान्वित होंगे बल्कि इस ज्ञान से लाखों हृदय रोगियों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष कॉन्फ्रेंस 2 दिन के बजाय 3 दिन की होगी जिसमें 1 दिन लाइव केस भी सॉल्व किए जाएंगे।
65 वर्ष की उम्र पर ईको जरूरी
मेदांता मेडिसिटी में कार्डियोलॉजी के चेयरमैन डॉ. रजनीश कपूर ने बिना सर्जरी के वाल्व रिप्लेसमेंट की जानकारी देते हुए बताया कि 65 वर्ष की उम्र के बाद 5 से 7 फीसदी लोगों का एओर्टिक बाल्व सिकुड़ने लगता है। इससे हार्ट फेल हो सकता है। 10 साल पहले तक इसका इलाज सिर्फ सर्जरी पर था पर इस उम्र में सर्जरी करना घातक रहता है। इस उम्र में बिना चीर फाड़ के बाल्व का बदला जाना इन मरीजों के लिए जीवन रक्षक पद्धति साबित हुआ है। जरूरत इस बात की है कि सीनियर सिटीजन सांस फूलना या छाती में भारीपन महसूस करें तो ईको का स्क्रीनिंग टेस्ट अवश्य कराएं ताकि हृदय के बाल्व की सही जानकारी मिल सके और समय रहते बाल्व की सिकुड़न का इलाज कराया जा सके।
कल तक तो ठीक थे, अचानक कैसे चल बसे..
मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली के डॉ. अमित मलिक ने “सडन कार्डियक डेथ” पर बोलते हुए कहा कि अक्सर यह सुनने को मिलता है कि वह कल तक तो ठीक थे। जिम में फिट थे। खेलते खेलते चलते फिरते अचानक कैसे चल बसे!! ऐसा अक्सर सडन कार्डियक डेथ के कारण होता है। दरअसल इस तरह की मृत्यु से कुछ हफ्तों पहले हमारा शरीर हमें अनयूजुअल थकावट, अनयूजुअल गैस बनने या धड़कन का थोड़े समय के लिए अनियमित हो जाने के रूप में हमें संकेत देता है, लेकिन हम इन ग्रीन सिग्नलों को नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में समय से सीपीआर दी जाए तो मरीज को सरवाइव किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीपीआर की ट्रेनिंग आम जनता और स्कूली बच्चों को दिया जाना अब बेहद आवश्यक हो गया है।
नई दवाएं छांट रहीं चर्बी..
दिल्ली के डॉक्टर सुमित सेठी ने कहा कि हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से ब्लॉकेज होते हैं। उनको अब तक स्टाटिंस दवा दी जाती है। कुछ लोगों में इस दवा के साइड इफेक्ट देखे जा रहे थे। अब एजेटेमाइब और बैम्पेडाइक एसिड ऐसी नयी दवाएं आई हैं, जिनसे से चर्बी भी छंट रही है और शरीर में दर्द भी नहीं हो रहा।
ब्लॉकेज के प्रति बरतें सतर्कता
मेदांता के डॉक्टर मनीष बंसल ने कहा कि आमतौर पर 70 से 80 परसेंट ब्लॉकेज होने पर समस्या बनती है लेकिन 40 फीसदी ब्लॉकेज होने पर भी हृदयाघात हो सकता है अगर कोलेस्ट्रॉल बाहर निकलकर रक्त के संपर्क में आकर रक्त का थक्का बना दे। इसलिए ब्लॉकेज के प्रति सतर्कता बरतना जरूरी है।
भारतीयों में हृदयाघात का खतरा ज्यादा
फरीदाबाद के डॉक्टर गजेंद्र गोयल ने बताया कि यूरोप और बाकी दुनिया की तुलना में भारतीयों को हृदयाघात की डेढ़ से दो परसेंट ज्यादा रिस्क देखी गई है। इसलिए 18 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को लिपिड प्रोफाइल की जांच कराना बहुत जरूरी है।
इन्होंने भी दिए व्याख्यान..
अपोलो दिल्ली के डॉ. विवेक गुप्ता ने बाईपास सर्जरी के बाद एंजियोप्लास्टी की जरूरत पर व्याख्यान दिया। डॉ. सुनील बंसल ने डायबिटीज और हार्ट फेलियर के बारे में बताया। दिल्ली के डॉ. संदीप सिंह और डॉ. धीरज शर्मा ने कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी में आर्ट ऑफ सिलेक्शन पर उपयोगी विचार रखे। डॉ. आयुष शुक्ला ने भी व्याख्यान दिया।
इनकी भी रही सहभागिता
डॉ. शरद पालीवाल, डॉ. विजय खुराना, डॉ. हिमांशु यादव, डॉ. अरविंद जैन, डॉ. एके गुप्ता, डॉ. राजकुमार गुप्ता, डॉ. अतुल गुप्ता, डॉ. सुनील बंसल, डॉ. दीपक अग्रवाल, डॉ. सुब्रत अखौरी, डॉ. बसंत गुप्ता, डॉ. सुमित अग्रवाल, डॉ. मुकेश गोयल, डॉ. सौरभ नागर, डॉ. वरुण शर्मा, डॉ. संजय सक्सेना, डॉ. वाईबी अग्रवाल और डॉ. गगनदीप चेयर पर्सन और मॉडरेटर्स की भूमिकाओं में रहे। डॉ. विनीश जैन, डॉ. ईशान गुप्ता, डॉ. नीरज कुमार, सुरेश सिंह और नेहा सक्सैना का भी विशेष सहयोग रहा। नेशनल कांफ्रेंस का निर्देशन सोसायटी के प्रेसिडेंट प्रो. डॉ वीके जैन और संयोजन- संचालन डॉ. सुवीर गुप्ता ने किया। डॉ. जीडी आर्य और समाजसेवी वीरेंद्र गुप्ता भी मौजूद रहे। नेशनल कांफ्रेंस का कुशल प्रबंधन “बी इवेंट फुल” की मेघा बंसल और आयुष बंसल ने किया।