आगरालीक्स…क्या आगरा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मेट्रो सबसे बेहतर विकल्प होगी. यूपीएमआरसी ने कहा—आगरा मेट्रो हर कदम पर पर्यावरण संरक्षण के मिशन के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध
आगरा मेट्रो शहर के पर्यावरण और आस-पास के वातावरण को बचाने के लिए समर्पित है और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। आगरा राज्य का चौथा सबसे ज़्यादा आबादी वाला शहर है और दुनिया भर में अपने ऐतिहासिक स्मारकों जैसे ताज महल, आगरा क़िले आदि के लिए मशहूर है। हेरिटेज कॉरिडोर पर मेट्रो सेवाओं की उपलब्धता के साथ, आगरा मेट्रो ताजमहल, आगरा किला और मनकामेश्वर मंदिर जैसे प्राचीन स्मारकों को जोड़ता है, इस मार्ग पर परिवहन आसान और सुगम हो गया है। इससे न केवल वाहनों के चलने से होने वाले कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिली है, बल्कि यह एक सुरक्षित, सुगम एवं आरामदायक परिवहन का साधन है जो आगरा की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाता है।आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के सभी स्टेशनों को 'ग्रीन मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम' (MRTS) श्रेणी के तहत IGBC (इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल) की 'प्लैटिनम रेटिंग' से सम्मानित किया गया है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बोलते हुए, यूपीएमआरसी के एमडी श्री सुशील कुमार ने कहा, "आगरा मेट्रो हर कदम पर पर्यावरण संरक्षण के मिशन के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए IGBC प्लैटिनम रेटिंग मिलना, आगरा में पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल ट्रांजिट हब बनाने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। आगरा मेट्रो स्टेशन सतत शहरी विकास के लिए एक नया मानक स्थापित करते हैं।"
आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को पहले ही ISO 14001 (पर्यावरण प्रबंधन के लिए) और ISO 45001 (सुरक्षा प्रबंधन के लिए) से सम्मानित किया जा चुका है। यूनाइटेड किंगडम के UKAS से संबद्ध, नोएडा स्थित 'यूनाइटेड रजिस्ट्रार ऑफ सिस्टम्स' ने ISO 14001 और ISO 45001 से संबंधित सभी मानक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की अनुशंसा की है।
आगरा मेट्रो स्टेशनों पर कई सतत विशेषताएं और पहल अपनाई गई हैं, जिनमें शामिल हैं:
जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन: आगरा मेट्रो के वायाडक्ट (ऊपरी मार्ग) और डिपो क्षेत्र में बनाए गए 'रीचार्ज पिट्स' के माध्यम से एक वर्षा काल में लगभग 10 लाख लीटर पानी का संचयन करेगा जिससे भूगर्भ जलस्तर में निश्चित सुधार होगा।
सोलर पावर इंस्टॉलेशन: पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 1,000 kWp सोलर संयंत्र लगाने का काम चल रहा है और यह जल्द ही चालू हो जाएगा।
ग्रीन लैंडस्केपिंग: स्टेशनों के आस-पास के इलाकों में 250 से ज़्यादा पेड़ लगाए जा रहे हैं ताकि बायोडायवर्सिटी बढ़े और शहर के ग्रीन कवर में योगदान मिले।
एनर्जी-एफ़िशिएंट लाइटिंग: एनर्जी की खपत कम करने और सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए 100% LED लाइटें लगाई जा रही हैं।
जल संरक्षण के उपाय: बहुत ज़्यादा एफ़िशिएंट वॉटर फ़िक्स्चर, बारिश के पानी को जमा करने वाले सिस्टम और वायाडक्ट-लेवल पर बारिश का पानी पकड़ने के तरीकों से 40% से ज़्यादा पानी बचाया जा रहा है। इसके आगरा मेट्रो डिपो में जीरो डिस्चार्ज फैसिलिटी के प्रयोग किया किए को पुनः इस्तेमाल किया जाता है।
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम: रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम लागू करके 43% से ज़्यादा एनर्जी बचाने का लक्ष्य रखा गया है।
एयर कंडीशनिंग सिस्टम: एयर कंडीशनिंग उपकरणों और सिस्टम की एफ़िशिएंसी में 15% से ज़्यादा सुधार हासिल किया जा रहा है।
पर्यावरण के अनुकूल आग बुझाने के सिस्टम: ऐसे आग बुझाने के सिस्टम इस्तेमाल किए जा रहे हैं जो ओज़ोन को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों से मुक्त हैं; इनमें ऐसे रेफ़्रिजरेंट इस्तेमाल होते हैं जिनका ओज़ोन डिप्लीटिंग पोटेंशियल (ODP) और ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) कम या बिल्कुल नहीं होता।
- इलाके में धूल कम करने के लिए सभी कंस्ट्रक्शन साइटों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाता है।
- कंस्ट्रक्शन की वजह से सड़कों और रास्तों पर जमा धूल और गंदगी को साफ़ करने के लिए हाथ से और मशीनों से सफ़ाई की जाती है।
- हवा में धूल के कणों के असर को कम करने और कंस्ट्रक्शन साइटों के आस-पास हवा की क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर एंटी-स्मॉग गन चलाई जाती है।
- प्रदूषण का स्तर तय सीमा के अंदर रहे, यह पक्का करने के लिए PM (पार्टिकुलेट मैटर) की नियमित निगरानी की जाती है।