आगरालीक्स ….नेशनल हाईवे पर हादसों की रोकथाम के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया को करनी होगी इलेक्ट्रोनिक निगरानी। आगरा के अधिवक्ता की याचिका पर पर दिया गया निर्णय। देश में कुल हादसों में 36.4 मौतें नेशनल हाईवे पर।

वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन की याचिका पर उनको सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है, कहा है कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136 ए के अन्तर्गत इलैक्ट्रोनिक माॅनिटरिंग के माध्यम से सड़क सुरक्षा का जो रोड मेप बनाया जाना है उसमें राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले हादसों की बड़ी संख्या को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को भी सम्मिलित किया जाये।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह कहा कि उसके पूर्व के आदेश दिनांक 6 जनवरी 2023 के अनुपालन में सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष जस्टिस ए0एम0 सप्रे द्वारा सड़क सुरक्षा पर बैठक की गयी जिसका कार्यवृत्त न्यायालय मित्र (एमिकस क्यूरी) गौरव अग्रवाल अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया। समिति द्वारा मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 136 ए का कार्यान्वयन के लिए एक रोड मैप तैयार किया है किन्तु याचिकाकर्ता के सुझावों में से एक सुझाव आया है कि एनएचएआई को सड़क सुरक्षा की योजना के कार्यान्वयन के लिए सम्मिलित किया जाये जिसकी आवश्यकता राष्ट्रीय राजमार्गों पर बड़ी संख्या में होने वाले हादसों को ध्यान में रखते हुए है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपरोक्त पहलू को समिति ध्यान में रखे ताकि एनएचएआई के सम्बन्ध में भी यदि आवश्यकता हो तो निर्देश दिये जा सकें। आवेदन पत्र को 6 अप्रैल 2023 को भी सूचीबद्ध करने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये।
नेशनल हाईवे पर 36.4 प्रतिशत मौतें
आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता जैन द्वारा कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश किया है वह महत्वपूर्ण है क्योंकि केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय की सड़क दुर्घटनाओं पर वर्ष 2001 की जारी की गयी रिपोर्ट के अनुसार देश में हुयी सड़क हादसों में कुल मौत 1,53,272 में से 56,007 मौतें राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुयीं थीं जो कुल सड़क हादसों में हुयी मौतों का 36.4 प्रतिशत थीं। जस्टिस सप्रे वाली कमेटी ने जो प्रस्ताव तैयार किया था वह इलैक्ट्रोनिक निगरानी केवल उन 132 शहरों में करने का था जहां जनसंख्या 10 लाख से अधिक है। प्रस्ताव में राष्ट्रीय राजमार्गों पर इलैक्ट्रोनिक निगरानी की कोई योजना नहीं बनायी थी जिसको लेकर अधिवक्ता जैन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना सुझाव एनएचएआई को भी इस योजना का हिस्सा बनाये जाने का दिया गया जिसको सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई उपरान्त स्वीकार किया गया है जिसका समर्थन न्यायमित्र गौरव अग्रवाल द्वारा भी किया गया।