नईदिल्लीलीक्स… सुप्रीम कोर्ट ने तलाक के एक मामले में अहम व्यवस्था दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह फैमिली कोर्ट में केस के बिना भी पति-पत्नी की सहमति से तलाक की अनुमति दे सकता है।

पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने दिया फैसला
जस्टिस एसके कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस एएस ओक, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दी है।
सितंबर 22 से फैसला सुरक्षित रखा था
मामले में सुनवाई पूरी करते हुए पीठ ने 29 सितंबर 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।
शक्तियों का उपयोग कर कर सकता है फैसला
पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शीर्ष न्यायालय को प्राप्त असीम शक्तियों का उपयोग करते हुए वह तलाक का फैसला सुना सकता है।
इस तरह भी समझा जा सकता है
दूसरे शब्दों में कहें तो यदि कोई पति-पत्नी शादी को जारी नहीं रख पा रहे हैं और तलाक के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं तो सर्वोच्च अदालत उन्हें फैमिली कोर्ट भेजने के बजाए खुद ही अलग होने का आदेश जारी कर सकती है।