आगरालीक्स…आजकल इंटर डिसीप्लिनरी प्रोजेक्ट की मांग अधिक है, जिसमें सामाजिक बदलाव या शोध कार्य को नई वैज्ञानिक विधियों द्वारा स्थापित किया जाता है. विश्वविद्यालय में हुई इंटरफेस मीटिंग
डॉ भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क स्थित वृहस्पति भवन में आज दिनांक 12 मई शुक्रवार को इतिहास विभाग ने विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशुरानी की अध्यक्षता में एक इंटरफेस मीटिंग का आयोजन किया गया, जिसमें आईसीएसएसआर नई दिल्ली की डिप्टी डायरेक्टर डॉ वृंदा जैन उपस्थित रहीं और विषय पर व्याख्यान दिया ।
बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता ने सभी को आईसीएसएसआर से ग्रांट लेने के लिए अमल में लाई जाने वाली प्रक्रिया के साथ प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। बताया कि पिछले वर्ष आईसीएसएसआर को कुल 7310 प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्राप्त हुई जिनमें से 428 को मूल्यांकन के बाद ग्रांट जारी किया गया। साथ ही आईसीएसएसआर तीन तरह से ग्रांट देता है, पहला रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए जो मेजर, माइनर और रिसर्च के लिए दिया जाता है. मेजर में 18 से 24 महीने के लिए अधिकतम 15 लाख, माइनर में एक साल के लिए अधिकतम पांच लाख और रिसर्च प्रोजेक्ट में अधिकतम 15 से 40 लाख तक कि ग्रांट दी जाती है। इसके लिए संस्थान समय समय पर आवेदन निकालता है। एक आवेदन में ऐसे विषय को चुनना चाहिए जो संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास के 17 लक्ष्यों के साथ प्रधानमंत्री के पंच प्राण सिद्धांतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हो। प्रोजेक्ट पर विशेष ध्यान दिया जाता है,जो भविष्य की चुनौतियों और सामाजिक व आर्थिक परिवर्तनों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं। संस्थान को प्राप्त सभी प्रोजेक्ट का मूल्यांकन विशेषज्ञों की कमेटी से कराया जाता है। उसके बाद निर्धारित किया जाता है कि किन प्रोजेक्ट को ग्रांट दी जाएगी और कितने रिजेक्ट किया जाएगा। प्राप्त होने वाले अधिकांश प्रोजेक्ट इसलिए निरस्त हो जाते हैं क्योंकि उनमें नवाचार व प्रभाव का पक्ष प्रभावी नहीं होता।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो आशुरानी ने बताया कि आजकल इंटर डिसीप्लिनरी प्रोजेक्ट की मांग अधिक है, जिसमें सामाजिक बदलाव या शोध कार्य को परम्परागत तरीके की जगह नई वैज्ञानिक विधियों द्वारा स्थापित किया जाता है। उन्होंने सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को आगामी घोषणा के बाद स्वयं भी प्रोजेक्ट भेजकर आवेदन करने के लिए प्रेरित किया। शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों ने भी कई प्रश्न पूछकर अपनी शंका का समाधान किया साथ ही इस प्रयास की छात्रहित में सरहाना करते हुए सभी विभागों को ऐसे आयोजन करने के लिए कहा। प्रति कुलपति प्रो अजय तनेजा, प्रो सुगम आंनद, डीन अकादमिक प्रो संजीव कुमार, डीन कला संकाय प्रो यूसी शर्मा, डीन रिसर्च प्रो विनीता सिंह, प्रो मीनाक्षी श्रीवास्तव, इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो बीड़ी शुक्ला, प्रो अनिल वर्मा, प्रो प्रज्ञा शर्मा, प्रो रणवीर सिंह, प्रो यूएन शुक्ला, डॉ नीलम यादव, अखिलेश सक्सेना आदि मौजूद रहे।