आगरालीक्स…आगरा में अब कम होते जा रहे हैं कढ़ाही का दूध पीने के शौकीन। रात के दो-दो बजे तक खुलती थीं दुकानें। युवाओं को अब कोल्ड डिंक्स पसंद।
ब्रज के लोग शौकीन होते थे कढ़ाही के दूध के

एक जून को वर्ल्ड मिल्क डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दूध और उससे बने उत्पादों से लोगों को जागरूक करना है। आगरा ब्रज का प्रमुख शहर होने के नाते यहां दूध-दही और उससे बनाने के पदार्थों का इस्तेमाल भी खूब होता है।
हर मोहल्ले में कढ़ाही में औंटता था दूध
आगरा में तीन-चार दशक पहले तक करीब-करीब हर मोहल्ले में दो-चार कढ़ाही का दूध बेचने वालों की दुकानें हुआ करती थीं, जहां कढ़ाही में शाम से दूध औंटना शुरू हो जाता था और रात दो-दो बजे तक दुकानदार दूध बेचा करते थे लेकिन अब दूध बेचने वालों ने अपनी दुकानों में अन्य दुग्ध उत्पाद बेचना शुरू कर दिया है।
सेठगली में हर दुकान के आगे लगी होती थी दूध की कढ़ाही, कुल्हड़ में ही आता है स्वाद
आगरा की प्रमुख सेठगली में कई मिठाई की दुकानों पर सुबह से ही दूध की कढ़ाही लग जाती थी और देर रात तक कुल्हड़ में गरमा-गरम दूध दिया जाता था।
सुनहरा हो जाता था दूध,मलाई भी मोटी
सेठगली के अलावा अन्य स्थानों पर भी दूध भट्टियों में धीमी-धीमी आग में गर्म होने के कारण लालिमा पर आ जाता था, जो गाढ़ा होने के साथ स्वाद में भी लाजवाब होता था। अब दुकानदार दूध को सुनहरा करने के लिए गऊछाप रंग का भी इस्तेमाल करते हैं।
तगार की जगह अब चीनी का प्रयोग
कढ़ाही का दूध बेचने वाले अब दूध को मीठा करने के लिए तगार (देशी खांड) की जगह चीनी का इस्तेमाल करते हैं तगार का प्रयोग तो अब इक्का-दुक्का दुकानदार ही करते हैं।
कढ़ाही के दूध को फेंटना भी एक कला

आगरा में कढ़ाही के दूध बेचने वाले लोग गर्म दूध को तगार मिलाने के बाद ऊपर से नीचे एक बाद एक इतनी तेजी से फेंटते थे कि तगार दूध में मिल जाती थी और दूध भी चस्क लेकर पीने लायक बन जाता था।
शादी-ब्याह में लगते हैं स्टॉल
शादी समारोह की दावतों में अब कढ़ाही के दूध का स्टॉल लगाया जाता है लेकिन इन स्टॉलों पर भी दूध पीने वालों की संख्या काफी कम होती है। हालांकि इन स्टॉलों पर दूध में मखाने, काजू, मलाई के ऊपर डाले जाते हैं। केसर भी मिली होने का दावा होता है।
अब भी मिलता है कई स्थानों पर अच्छा कढ़ाही का दूध
आगरा में अब भी कई स्थानों पर अच्छा कढाही का दूध मिलता है, जिसे पीने के लिए दूरदराज से भी लोग आते हैं।