आगरालीक्स…एक घंटे की बारिश में डूब जाती हैं शहर की पॉश कॉलोनियां. ये वो कॉलोनियां हैं जहां एक इंच जमीन की कीमत भी हजारों में है…किस कॉलोनी का सबसे बुरा हाल, आप भी बताएं
आगरा को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है. मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं, शहर को विकसित करने के लिए भी कई सारी योजनाएं चल रही हैं लेकिन एक घंटे की बारिश में सारी हकीकत धरी की धरी रह जाती हैं. स्मार्ट सिटी आगरा एक घंटे की बारिश में डूब जाता है. सबसे ज्यादा बुरा हाल तो उन कॉलोनियों का है जो कि शहर की सबसे अधिक पॉश कॉलोनी कहलाई जाती हैं. इन कॉलोनियेां में जमीन की कीमत 20 हजार रुपये से लेकर 50 हजार, 60 हजार, 70 हजार रुपये गज के बराबर हैं. कइयों में तो इससे भी ज्यादा है. लेकिन एक घंटे की बारिश में ये कॉलोनियां नहर में तब्दील हो जाती हैं. जलभराव इतना अधिक हो जाता है कि यहां से निकलना तक मुश्किल हो जाता है. कमला नगर हो या फिर बल्केश्वर, शास्त्रीपुरम हो या फिर आवास विकास, दयालबाग हो या फिर लॉयर्स कॉलोनी, मधुनगर हो या फिर ताजनगरी. हर जगह पानी भर जाता है.
मंगलवार को हुई एक घंटे की झमाझम बारिश ने लोगों को गर्मी से काफी राहत दी लेकिन बारिश के बाद भी जब कई घंटों तक जलभराव रहा तो यह उन्हें तकलीफ देने वाला हुआ. नाले नालियों की सिल्ट सड़कों पर बिखरी हुई थी. कॉलोनियों की दुर्दशा इतनी अधिक हो गई थी कि लोगों को कीचड़ से होकर निकलना पड़ा.

सड़कें पर चल रहा है काम, बारिश में खतरे से कम नहीं
आगरा की अधिकतर कॉलोनियों में खुदाई का काम चल रहा है. कहीं सीवर लाइन डालने के लिए सड़क को खोदा गया है तो कहीं पानी की पाइपलाइन डालने का. कहीं सड़क बनने के बाद बिजली के काम के लिए उसे फिर से तोड़ दिया जाता है तो कहीं मोबाइल नेटवर्क की लाइन बिछाने के लिए. ये काम हर समय चलते रहते हैं. बड़ी बात ये है कि कई सालों बाद अगर किसी कॉलोनी या किसी मुख्य मार्ग की सड़क बनाई जाती है तो कुछ दिनों या कुछ महीनों बाद ही उसे किसी न किसी काम के लिए खोद दिया जाता है. उसे फिर से ठीक नहीं किया जाता बल्कि मिट्टी से उसे पाटने का ही काम किया जाता है जिससे सड़कों पर गड्ढे हो जाते हैं और सड़कें धंस भी जाती हैं. इसके कारण यहां बारिश का पानी भर जाता है और फिर यहां से निकलना किसी खतरने से कम नहीं होता है.

जलभराव की एक वजह ये भी
आगरा की कॉलोनियों में जलभराव की एक वजह ये भी है कि लोगों ने अपने के सामने निकलने वाली नाली को पक्की रैम्प बनाकर पाट दिया है. कई—कई फुट लंबी रैम्प बना दी जाती हैं जिससे नालियों की ठीक से सफाई नहीं हो पाती. उनके अंदर कूड़ा फंस जाता है जो कि फिर निकल नहीं पाता और जब बारिश होती है तो जलभराव हो जाता है. ये समस्या किसी एक कॉलोनी की नहीं बल्कि सभी कॉलोनियों की है.
