आगरालीक्स…आगरा में मॉल्स, होटल्स, लॉजिंग हाउस पर प्रॉपर्टी टैक्स कई गुना अधिक लिया जा रहा है. यदि औद्योगिक भवनों से इतना टैक्स लेंगे तो कैसे होगा औद्योगिक विकास।
औद्योगिक भवनों का किराया आगरा व सभी शहरों में आवासीय भवनों की तुलना में कम होता है, फिर नगर निगम की सम्पत्ति नियमावली के संशोधन के प्रारूप में आवासीय भवन के किराये का 3 गुना किया जाना उचित नहीं है। किराया ही सम्पत्ति कर के लगाने का आधार उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 में है। सम्पत्ति कर प्रयोजन के लिए औद्योगिक भवनों का किराया आवासीय भवनों के किराये के बराबर या कम होना चाहिए। यह सूझाव वरिष्ठ अधिवक्ता के0सी0 जैन के द्वारा शासन को उ0प्र0 नगर निगम (सम्पत्ति कर) (चतुर्थ संशोधन) नियमावली, 2023 के ड्राफ्ट के सम्बन्ध में भेजा है जिसको भेजने की आज आखिरी दिनांक थी।
अधिवक्ता जैन द्वारा यह भी बात उठायी गयी है कि औद्योगिक भवनों पर अधिक सम्पत्ति कर लगाने से नगर निगम सीमा में उद्योगों की स्थापना के उपर विपरीत प्रभाव पड़ेगा जो कि शासन की औद्योगीकरण और रोजगार सृजन की नीति के विरूद्ध होगा।

अपने सुझावों में यह बात भी उठायी गयी है कि भवन निर्माण के समय भवन उपविधियों के अन्तर्गत जो भूमि सेटबैक के रूप में छोड़ना अनिवार्य होता है उस पर कोई सम्पत्ति कर नहीं लगना चाहिए क्योंकि ऐसी भूमि भवन के निर्माण एवं प्रयोग के लिए छोड़ा जाना आवश्यक है। सेटबैक की भूमि पर अलग से प्रोपर्टी टैक्स लगाना उचित नहीं है।
आवासीय भवनों में नगर निगम अधिनियम की धारा 174(2)(अ) के अनुसार उनकी आयु को देखते हुए मूल्य ह्नास दिया जाता है जो कि 10 वर्ष तक के पुराने भवनों पर 25 प्रतिशत, 10 से लेकर 20 वर्ष तक के पुराने भवनों पर 32.5 प्रतिशत और 20 से अधिक पुराने भवनों पर 40 प्रतिशत कमी की जाती है। लेकिन औद्योगिक अथवा व्यवसायिक भवनों पर ऐसी छूट नहीं दी जाती है जो गलत है। यह छूट गैर आवासीय भवनों के लिए भी समान रूप से लागू होनी चाहिए।
प्रस्तावित नियमावली के अन्तर्गत मॉल की एक नयी श्रेणी बनायी गयी है जिस पर प्रोपर्टी टैक्स लगाने के लिए आवासीय भवन के किराये की तुलना में 6 गुना दर प्रस्तावित की गयी है। लेकिन मॉल क्या है इसकी परिभाषा नहीं दी गयी है जिससे कानूनी कठिनाईयां और विवाद उत्पन्न होंगे। मॉल को परिभाषित किया जाना चाहिए जिसका प्रयोजन ऐसे भवनों से होना चाहिए जहां सिनेमा हो जिसमें कई स्क्रीन हो और सेल आउटलेट्स हों। मॉल का प्रस्तावित किराया आवासीय भवनों के किराये की तुलना में 5 गुने से अधिक नहीं होना चाहिए।
अधिवक्ता जैन ने यह भी बात उठायी है कि जहां प्रोपर्टी टैक्स के लिये होटलों का किराया आवासीय के मुकाबले 3 गुना प्रस्तावित किया जा रहा है लेकिन जो होटल पर्यटन विभाग के साथ में रजिस्टर्ड नहीं हैं उनका किराया 6 गुना प्रस्तावित है। मात्र पर्यटन विभाग के रजिस्ट्रेशन होने या न होने से किसी भी होटल का किराया कम या अधिक नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार लॉजिंग हाउस का 6 का गुणांक इस आधार पर लगाना उचित नहीं है कि वहां खाने के साथ शराब बेची जा सकती है। जहां शराब की बिक्री पर टैक्स के प्राविधान लागू होते हैं वहीं प्रोपर्टी टैक्स के लिये शराब बेचने वाले लॉजिंग हाउस का 6 गुना किराया निर्धारित किया जाये यह उचित नहीं होगा।