मथुरालीक्स… वृंदावन में बंदर श्रद्धालुओं के चश्मे क्यों उतार ले जाते हैं? रिसर्च में…
वृंदावन, दिल्ली, बरेली के बंदरों पर अध्ययन

भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान के वन्य जीव विभाग के वैज्ञानिक वृंदावन के बंदरों के लोगों के चश्मे उतार ले जाने, टीबी के साथ दिल्ली और बरेली के बंदरों पर रिसर्च किया है।
बंदरों के अब फल मिलने हो गए हैं बंद
विभाग के प्रधान विज्ञानी अभिजीत पावड़े ने बताया कि जंगल- बाग कटने के कारण बंदरों को पसंदीदा फल मिलने बंद हो गए। आबादी में तला-भुना इंसानी भोजन मिला मगर इससे पेट नहीं भर सका।
दिल्ली के 70 फीसदी बंदरों को टीबी, पोस्टमार्टम भी दिल्ली में 100 जिंदा एवं मृत बंदरों के एक्सरे किए, उनमें 70 प्रतिशत जबकि वृंदावन व बरेली के पांच प्रतिशत बंदरों के फेफड़े संक्रमित थे। इन सभी बंदरों को टीबी की बीमारी हुई थी।
बंदरों के हमले पर तीन टीमों ने किया अध्ययन
उन्होंने बताया कि दिल्ली और वृंदावन में बंदरों के हमलों के मामले सामने आने पर तीन टीमें अध्ययन को भेजी गई थीं। दिल्ली की टीमों ने कुछ जिंदा बंदरों को पकड़कर उनके स्वभाव एवं खानपान पर अध्ययन किया। कुछ मृत बंदरों का पोस्टमार्टम भी किया। वृंदावन में श्रद्धालुओं का चश्मा खींच ले जाने की शिकायतों पर भी अध्ययन किया गया है।