आगरालीक्स…आगरा में 24 साल के कोचिंग संचालक धर्मवीर के मर्डर का हद से ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा..ऐसा खुलासा जिसे जानकर हर कोई रह गया शॉक्ड…
आगरा के रहने वाले 24 साल के कोचिंग संचालक धर्मवीर के मर्डर का पुलिस ने जो खुलासा किया है वह काफी चौंकाने वाला है. हत्या का पहला एंगल प्रॉपर्टी ही थी और इसी एंगल पर काम करके पुलिस ने एक के बाद एक जांच के तार जोड़ते हुए जो जो खुलासा किया है वह हद से ज्यादा चैंकाने वाला निकला. 24 साल के धर्मवीर का मर्डर उसके ही जीजा योगेश ने अपने दो भाइयों के साथ करवाया था. वो जीजा जिसके साथ धर्मवीर की बहन की शादी तीन महीने पहले ही हुई थी और उसमें धर्मवीर ने 50 लाख रुपये खर्च किए थे. छोटी बहन की शादी की बात भी बड़ी बहन के देवर के साथ चल रही थी, लेकिन प्रॉपर्टी का लालची जीता ने सबकुछ हड़पने के लिए इकलौते धर्मवीर का ही मर्डर करा दिया.
फिरोजाबाद में किया था मर्डर
आगरा के महुआखेडा निवासी 24 साल के धर्मवीर यादव एसएससी की तैयारी कर रहा था, घर से कोचिंग 12 किलोमीटर दूर है इसलिए वह कई बार कोचिंग में ही रुक जाता था। शुक्रवार रात को वह घर से यह कह कर गया था कि रात में कोचिंग पर ही रुकेगा, उसकी रात 10 बजे मां चंद्रवती से बात हुई, उसने बताया कि वह दोस्तों के साथ घूमने जा रहा है। शनिवार सुबह शनिवार सुबह फिरोजाबाद से फतेहाबाद रोड को जोड़ने वाले मार्ग पर एक गांव के पास सुनसान जगह पर थार खड़ी हुई थी, स्थानीय लोगों ने थार के अंदर देखा तो ड्राइवर सीट के बगल की सीट पर धर्मवीर यादव का शव पड़ा था। सीट बेल्ट लगी हुई थी और माथे पर बीचों बीच गोली लगी थी। पुलिस के पहुंचने के बाद धर्मवीर यादव की शिनाख्त हुई, उनके परिजन भी पहुंच गए।

अकेला वारिस था धर्मवीर, एक करोड़ की बेची थी जमीन
धर्मवीर अपने घर का अकेला वारिस था और उसने हाल ही में एक करोड़ की जमीन बेची थी. उसी संपत्ति को हड़पने के लिए जीजा योगेश ने उसकी हत्या अपने भाइयों से कराई थी. घटना बड़ी सोची समझी साजिश के तहत की गई थी. योगेश पुणे में ही था और वह फोन पर ही सारी चीजों को आपरेट कर रहा था. योगेश का बड़ा भाई राजेश आगरा में ही था जबकि छोटा भाई भोपाल में था. योगेश और अक्षय दोनों सेना में नौकरी करते हैं.
तीन महीने पहले हुई थी योगेश से शादी
राजेश ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि योगेश की शादी तीन महीने पहले ही धर्मवीर की बड़ी बहन के साथ हुई थी. शादी में 50 लाख रुपये खर्च किए थे. उसके पास काफी पैसा और जमीन थी. उसकी छोटी बहन की शादी भी मेरे भाई अक्षय से तय हो रही थी. ऐसे में हम भाइयों के मन में याल आया कि अगर हम धर्मवीर को मार दें तो सारी प्रॉपर्टी हमारी हो जाएगी जिसके लिए हम लोगों ने पूरा प्लान बनाया. सबसे पहले छोटे भाई अक्षय को भोपाल से बिना टिकट के आगरा बुला लिया. अक्षय अपनी यूनिट में बिना बताए आगरा आया था. योगेश पुणे में था और उसे नहीं बुलाया क्योंकि उसे आने में समय लगता, वह फोन पर ही सबकुछ अपडेट लेता रहा. 28 जुलाई को अक्षय रात को आगरा स्टेशन आ गया और उसने तमंचा भोपाल में ही खरीद लिया था.
अक्षय को स्टेशन से लेने के लिए धर्मवीर को बुलाया. उसके बाद दोनों फिरोजाबाद जाने वाली रोड से थार गाड़ी से घर जा रहे थे. पीछे राजेश अपाचे गाड़ी से चल रहा था. धर्मवीर की गाड़ी को अक्षय चला रहा था. कुछ दूर चलने के बाद अक्षय ने टॉयलेट जाने के लिए गाड़ी को नगला सिंघी क्षेत्र के ग्वारई गांव के पास रोक दिया और वह गाड़ी से उतर कर पीछे की साइड चला गया और गाड़ी के सारे लॉक खोल दिए. उसके बाद राजेश अपनी अपाचे गाड़ी से दरवाजे के पास पहुंचा. इससे पहले कि धर्मवीर कुछ समझ पाता उसने माथे पर गोली चला दी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. धर्मवीर की मौत हो जाने के बाद बिना देरी अक्षय को अपनी बाइक पर बैठाया और हम लोग स्टेशन की ओर निकल गए. स्टेशन पर राजेश ने पहले अपनी दूसरी बाइक स्पलैंडर को पार्किंग में पहले ही लगा रहा था. वहां से वह स्पलैंडर गाड़ी लेकर घर की ओर निकल गया.
इसके बाद अक्षय अपाचे से दिल्ली एयरपोर्ट की तरफ निकल गया और उसने वहां पर अपनी गाड़ी को पार्किंग में खड़ा कर दिया और फ्लाइट से मुंबई होते हुए भोपाल पहुंच गया. भोपाल में उसने समय से अपनी यूनिट भी ज्वाइन कर ली. जिससे उसकी कोई छुट्टी का रिकॉर्ड न बने. वहीं दूसरी तरफ! पूरी जानकारी योगेश फोन पर राजेश से लेता रहा. राजेश ने इसके बाद तमंचों को भीकनपुर के जंगल में एक ट्यूबवेल के बराबर झाड़ियों में छुपा दिया और फिर घर वापस आ गया. पुलिस का कहना है कि शक के आधार पर अपने राजेश को हिरासत में लिया था. सख्ती से पूछताछ की तो उसने सारा सच बता दिया. तीनों भाइयों पर हत्या का केस दर्ज किया गया है. तीनों को अरेस्ट कर जेल भेजा जा रहा है.