आगरालीक्स…खतरे के संकेत. तेजी से फैल सकता है एच1एन1 स्वाइन फ्लू. वर्कशॉप में डॉक्टरों ने कहा—इन लोगों को सकती है परेशानी, इनका रखना होगा ख्याल
इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में आज एसजीपीजीआइ, लखनऊ असिस्टेंट प्रोफेसर अतुल गर्ग ने बताया कि हर वर्ष वायरल संक्रमण को लेकर एडवाइजरी जारी की जाती है। इस बार फरवरी से लेकर मार्च तक और सितंबर से लेकर अक्टूबर तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण फैल सकता है। लखनऊ में छह केस मिल चुके हैं लेकिन यह घातक नहीं है, उन्होंने बताया कि हर वार स्वाइन फ्लू का स्ट्रेन बदल रहा है, 2022 में एच3एन2 का संक्रमण फैला था, इस बार वायरस में बदलाव हुआ है और 2009 में फैले एच1एन1 से स्वाइन फ्लू फैलने की आशंका है, इसे लेकर स्वाइन फ्लू की वैक्सीन में भी बदलाव किया गया है।
टेमी फ्लू हो रही कारगर साबित
स्वाइन फ्लू की घातकता कम हुई है, साथ ही टेमी फ्लू दवा इस पर कारगर साबित हो रही है। ऐसे में स्वाइन फ्लू का संक्रमण घातक नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, इसमें मोटापा, मधुमेह, कैंसर, एचआइवी के मरीज शामिल हैं उन्हें परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाएं व किसी भी ग का ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों को भी खायल रखना होगा। अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण खत्म हो जाएगा। इसकी दूसरी लहर अगस्त के सितम्बर के बीच आ सकती है।
सूक्ष्मजीवों की पहचान व जांच के लिए छह वर्कशॉप का आयोजन
कार्यशाला के तहत वैक्टीरिया, वायरस, फंगस जैसे सूक्ष्मजीव व उनसे होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए एसएन मेडिकल कालेज में छ वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यसाला में 450 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल, सचिव डॉ. अंकुर गोयल, सहसचिव डॉ. विकास कुमार, डॉ. आरती अग्रवाल, डॉ. प्रज्ञा शाक्य, डॉ. सपना गोयल, डॉ. पारुल गर्ग, डॉ. श्वेता सिंघल आदि मौजूद थीं।
10 फरवरी को बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की जागरूकता के लिए निकलेगी वॉकथॉन
कार्यशाला के तहत 10 फरवरी को खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार से शहीद स्मारक तक वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। जिसका उद्देश्य अस्पताल व नर्सिंग होम के अलावा घरेलू इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण करने के प्रति आमजन में जागरूकता पैदा करना होगा। वॉतथॉन में एसएन मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों, डॉक्टर, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों सहित सैकड़ों लोग शामिल होंगे। जेपी सभागार में ही सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक साइंटिफिक सेशन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग व उसके कारण माइक्रोऑरगेनिज्म में दवाओं के प्रति पैदा होने वाली प्रतिरोधकता जैसे गम्भीर विषयों पर डॉक्टरों के साथ पैनल डिसकशन में चर्चा होगी। 300 से अधिक रिसर्च पेपर व पोस्टर का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।