आगरालीक्स …श्री कृष्ण भगवान ने धरती पर महत्वपूर्ण उद्देश्य से जन्म लिया था। कंस के अत्याचारों से अपनों भक्तों को मुक्त कराना और भक्तों का उद्धार करना था। यह अमृत वचन कथा वाचक अरविन्द प्रभु ने श्री जगन्नाथ मंदिर (कमला नगर, रश्मि नगर स्थित) में श्री भागवत कथा के प्रथम दिन भक्तों के बीच कहे। पहले दिन श्रीकृष्ण जन्म व कंस के अत्याचारों का वर्णन किया गया।
शाम 5 बजे से प्रारम्भ हुई कथा में अवरिन्द प्रभु ने कहा कि देवकी देवस की पुत्री व कंस राजा उग्रसेन का पुत्र था। अपनी चचेरी वहन देवकी से बहुत स्नेह करने के बावजूद कंस ने जब देवकी द्वारा अपना अहित होना देखा तो वह देवकी व उनके पुत्रों का भी दुष्मन बन बैठा। लेकिन भगवान को तो अपने भक्तों का उद्दार करना था, इसलिए उन्होंने धरती पर जन्म लिया। श्रीकृष्ण के देवकी की कोख से जन्म लेने और गोकुल में यशोदा व नंद बाबा के घर तक पहुंचने की मार्मिक कथा का संगीतमय वर्णन किया गया। कंस के अत्याचारों की कथा पर जहां भक्तों की आंखें भर आयीं वहीं श्रीकृष्ण के जन्म पर मानों गोकुल के साथ भक्तों का खुला मुस्कुराता चेहरा उनके मन में हो रहे उत्सव को दर्शा रहा था।
कथा 15 अगस्त तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से 6.30 बजे तक चलेगी। इस अवसर पर हरि विजय दास, राहुल बंसल, गौरव बंसल, केशव अग्रवाल, अमित बंसल, लड्डू भाई, अखिल बंसल, डॉ. मयंक मित्तल, मुकेश तिवारी, नीतेश अग्रवाल, ईदेश गोयल, भरत शर्मा, कपिल अग्रवाल, कपिल अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
आध्यात्मिक जगत में ग्रहण का नहीं होता कोई प्रभाव
आगरा। कथा के दौरान सूतक होने की वजह से भगवान के पट बंद रहे। लेकिन भगवान की सेवा का कार्य चलता रहा। अरविनंद प्रभु ने भक्तों को बताया कि ग्रहण का प्रभाव भौतिक जगत यानि जीवों पर पड़ता है। आध्यात्मिक जगत में ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं होता।