आगरालीक्स …Agra News: आगरा के गिरजाघरों में विशेष प्रार्थनाएं हो रही हैं, हमें जीवन को ऐसा बनाना चाहिए कि जब भी प्रभु हमें बुलाएं, हम एक दयालु और प्रेमी न्यायकर्ता से मिलने योग्य हों ( Agra News: New Poojan Year of Christian calendar start, Prathana sabha in church#Agra )
ईसाई पंचांग के अनुसार रविवार 30 नवंबर से ईसाई समाज का नया पूजन-वर्ष प्रारम्भ हो गया है। इस अवसर पर आगरा सहित देशभर के गिरजाघरों में विशेष प्रार्थनाएं, पवित्र मिस्सा-अर्पण, आध्यात्मिक प्रवचन तथा आगमन काल (एडवेण्ट सीज़न) पर प्रार्थना की गई।आगमन काल के प्रथम रविवार को चर्च समुदाय प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा और तैयारी के साथ इस नए वर्ष का स्वागत करता है।
आगरा के वजीरपुरा रोड स्थित निष्कलंक माता महागिरजाघर में आयोजित मुख्य समारोह में आगरा महार्धप्रांत के महाधर्माध्यक्ष डॉ.राफी मंजलि ने पवित्र मिस्सा और विशेष प्रवचन के दौरान भक्तों को संबोधित करते हुए कहा—"प्रभु ईसा मसीह का पुनरागमन निश्चित है। वे दो हजार वर्ष पूर्व इतिहास में अवतरित हुए और अब संसार के अंत में न्याय करने पुनः आएँगे। अतः हमें प्रत्येक क्षण अपने जीवन को ऐसा बनाना चाहिए कि जब भी प्रभु हमें बुलाएं, हम एक दयालु और प्रेमी न्यायकर्ता से मिलने योग्य हों।" इस अवसर पर फादर राजन दास ने पवित्र मिस्सा अर्पित किया और फादर शाजी समारोह में विशेष रूप से उपस्थित रहे। सेंट मेरीज़ चर्च में आज के दिन विशेष प्रार्थना हुई जिसमें फादर सन्तोष डी'सा ने आगमन काल (एडवेण्ट सीज़न) के महत्व एवं इसके आध्यात्मिक संदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि—"आगमन काल प्रभु के आगमन की तैयारी का समय है। यह पश्चाताप, आत्मनिरीक्षण, संयम, दान और सेवा का काल है।"
इस अवसर पर फादर जोसेफ डाबरे, फादर अजय और फादर विन्सेन्ट ने नवपूजन वर्ष के पवित्र मिस्सा बलिदान का अर्पण किया। फादर विन्सेन्ट ने बताया कि ईसाई पूजन वर्ष विभिन्न कालों में विभाजित होता है, जिनमें प्रमुख हैं—आगमन काल, क्रिसमस काल, सामान्य पूजन काल, दुःखभोग(लेंट) काल, पास्का (ईस्टर) काल, पुनः सामान्य पूजन काल नववर्ष की शुरुआत आगमन काल से होती है, जो लगभग 3 से 3½ सप्ताह का होता है। इस अवधि में चर्च में विशेष सजावट नहीं की जाती, न ही वाद्ययंत्रों का प्रयोग होता है। पूजा वेदी पर फूल नहीं सजाए जाते और पुरोहित बैंगनी वस्त्र धारण करते हैं, जो पश्चाताप और आत्म-चिंतन का प्रतीक है। आगमन काल के प्रत्येक रविवार को एक-एक करके चार रंगीन मोमबत्तियाँ जलाई जाती हैं, जो आशा, विश्वास, आनंद और शांति के प्रतीक हैं। इन दिनों विवाह समारोह जैसे मांगलिक कार्यक्रम भी सामान्यतः आयोजित नहीं किए जाते। पुरोहित अपने प्रवचनों में सादा जीवन, भलाई, दान-पुण्य, गरीबों की सहायता और आध्यात्मिक तैयारी पर विशेष बल देते हैं।
क्रिश्चियन समाज सेवा सोसायटी के अध्यक्ष श्री डेनिस सिल्वेरा ने समस्त ईसाई समुदाय को नए पूजा-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए आगामी महापर्व क्रिसमस की आध्यात्मिक तैयारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा—"नया पूजन-वर्ष हम सभी को प्रभु के निकट आने और जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रेरित करता है। हम सभी प्रेम, शांति और सद्भाव के साथ क्रिसमस की तैयारी करें।