आगरालीक्स… आगरा से पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठेगी, बलूचियों की स्वतंत्रता की मांग को लेकर आगरा में हिन्द बलूच फोरम के तहत 25 अक्टूबर को सूरसदन में दोपहर 2 बजे अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार (विषय होगा ब्रूटल फेस ऑफ पाकिस्तान इन जम्मू एंड कश्मीर एंड बलूचिस्तान) का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ व वक्ता भाग लेंगे।
हिन्द बलूच फोरम के प्रदेश संयोजक पुष्कल गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने लाल किले से बलूचियों की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया था। भारत ही नहीं दुनिया भर को आतंकवाद का दंश दे रहे पाकिस्तान को सबक सिखाना जरूरी है। इसके लिए बलूचियों की स्वतंत्रता के मुद्दे को अन्तर्राष्ट्रीय फोरम पर लाना होगा। इसी उद्देश्य के साथ ताज नगरी में 25 अक्टूबर को सूरसदन में अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। पुष्कल गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य वक्ताओं के रूप में हिन्द बलूच पोरम के पैटर्न स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती, आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार, फोरम के अध्यक्ष पवन सिन्हा, सेवानिवृत्त जनरल जीडी बख्शी, पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ व आरएसएन सिंह मौजूद रहेंगे।
बलूचिस्तान
बलूचिस्तान दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान, ईरान के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान तथा बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत तक फैला हुआ है, लेकिन इसका अधिकांश इलाका पाकिस्तान के कब्जे में है, जो पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा है। इसी इलाके में अधिकांश बलूच आबादी रहती है। यह सबसे गरीब और उपेक्षित इलाका भी है।
बलूचिस्तान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से पर ईरान, दक्षिण-पश्चिमी हिस्से पर अफगानिस्तान और पश्चिमी भाग पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है। सबसे बड़ा हिस्सा तकरीबन पाकिस्तान के कब्जे में है। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इस संपूर्ण क्षेत्र में यूरेनियम, गैस और तेल के भंडार पाए गए हैं।
सामरिक दृष्टि से बलूचिस्तान का ग्वादर बंदरगाह ईरान, अफगान और भारत को टारगेट करने के लिए अच्छा बेस बन सकता है। इसके जवाब में भारत ने 2003 में ईरान के साथ ओमान की खाड़ी में होर्मूज जलडमरू के बाहर चाबहार पोर्ट के विकास का समझौता किया है। यह बंदरगाह बलूचिस्तान-ईरान की सीमा के पास ईरान के सिस्तान प्रांत में है। इससे पाकिस्तान से गुजरे बिना ही भारत, अफगानिस्तान पहुंच सकता है। 2015 में यह डील फाइनल हुई और अब वहां विकास कार्य शुरू हो चुका है।