आगरालीक्स…19 मार्च से शुरू होगा नव संवत्सर (हिंदू नववर्ष). अधिक मास के कारण 13 महीनों का होगा यह साल…जानिए ज्योतिष में कैसा रहेगा नव संवत्सर
भारतीय संस्कृति में समय की गणना केवल कैलेंडर तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि इसे प्रकृति, ग्रह-नक्षत्र और ब्रह्मांडीय व्यवस्था से जोड़कर देखा जाता है. सनातन परंपरा में नया साल केवल एक तारीख नहीं, बल्कि नई ऊर्जा, नए संकल्प और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. हिंदू नव वर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. इसी दिन से नए विक्रम संवत का आरंभ भी माना जाता है. भारत के अलग-अलग राज्यों में इसे गुड़ी पड़वा, उगादी, चेटी चंद जैसे नामों से भी मनाया जाता है. हिंदू नववर्ष के साथ ही चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है। ये नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित होते हैं।कब से शुरू होगा हिंदू नववर्ष 2026 -
साल 2026 में हिंदू नववर्ष 19 मार्च से शुरू होगा. इसी दिन से विक्रम संवत 2083 का आरंभ माना जाएगा. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन तक रहेगी. धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी. यही कारण है कि इस तिथि को बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है. इसी दिन से पूरे साल के व्रत, त्योहार और धार्मिक कार्यक्रमों का नया क्रम शुरू हो जाता है।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की इस साल हिन्दु नववर्ष के पहले ही दिन पर 3 शुभ योग शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। ये तीनों ही योग शुभ फलदायी होते हैं।
इस वर्ष ग्रहों की स्थिति
ज्योतिष के अनुसार, वर्ष 2026 में शुरू होने वाले नए संवत्सर को 'रौद्र संवत्सर' कहा जा रहा है. इस वर्ष हिंदू नववर्ष गुरुवार के दिन आरंभ हो रहा है, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस वर्ष के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे. वैदिक ज्योतिष में हर साल का प्रभाव इन ग्रहों की स्थिति के आधार पर देखा जाता है. बृहस्पति को ज्ञान, धर्म और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जबकि मंगल साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में इस साल धर्म, पराक्रम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है.
क्यों होगा 13 महीनों का साल
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की सामान्य तौर पर हिंदू पंचांग में 12 महीने होते हैं, लेकिन विक्रम संवत 2083 में कुल 13 महीने होंगे. इसकी वजह है अधिक मास का पड़ना. इस साल ज्येष्ठ मास दो बार आएगा, इसलिए साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाएगा. इस अतिरिक्त महीने को मलमास, अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है.
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है. चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष करीब 365 दिनों का माना जाता है. इस तरह दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर रह जाता है. इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है. यही अतिरिक्त महीना अधिक मास कहलाता है. ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार वर्ष 2026 में यह अधिक मास 17 मई से 15 जून के बीच रहेगा. इसके कारण कई प्रमुख व्रत और त्योहार सामान्य समय से करीब 15 से 20 दिन आगे हो सकते हैं.