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Agra Live News: Adhik Maas begins on May 17. Learn about the dates and the significance of Purushottam Maas…#agranews

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आगरालीक्स…17 मई से शुरू होगा अधिक मास. दो महीने के ज्येष्ठ माह में होंगे 8 बड़े मंगल. जानिए तिथि, पुरुषोत्तम मास का महत्व. इस माह में क्या करें और क्या न करें

पंडित हृदय रंजन शर्मा

इस वर्ष 2026 में अधिक मास "ज्येष्ठ मास" के रूप में पड़ रहा है. अधिक मास तीन साल में चंद्रमा और सूर्य के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए आता है। अतः इसे मलमास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. संवत् 2083 प्रथम ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष रविवार तारीख 17 मई 2026 से द्वितीय ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या दिन सोमवार 15 जून 2026 तक ज्येष्ठ मास "अधिक मास" के रूप में मान्य होगा. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, यह साल का सबसे बड़ा महीना होगा। ज्येष्ठ माह 2 मई से शुरू होकर 29 जून को समाप्त होगा. यानी इस महीने में कुल 59 दिन होंगे.

ज्येष्ठ माह के सभी मंगलवार को बुढ़वा मंगल या बड़ा मंगल कहा जाता है, यह हनुमान जी को समर्पित है. इसी महीने में हनुमान जी और राम जी का मिलन हुआ था. 2026 में 19 साल बाद दुर्लभ संयोग से ज्येष्ठ मास में 8 मंगलवार हो रहे हैं. अधिक मास के कारण 4 की जगह 8 मंगलवार होंगे -

बड़ा मंगलवार तिथियां :-
(प्रथम ज्येष्ठ मास) -

  1. 05 मई 2026 :- पहला बड़ा मंगल
  2. 12 मई 2026 :- दूसरा बड़ा मंगल
  3. 19 मई 2026 :- तीसरा बड़ा मंगल
  4. 26 मई 2026 :- चौथा बड़ा मंगल

(द्वितीय ज्येष्ठ मास) -

  1. 02 जून 2026 :- पांचवा बड़ा मंगल
  2. 09 जून 2026 :- छठा बड़ा मंगल
  3. 16 जून 2026 :- सातवां बड़ा मंगल
  4. 23 जून 2026 :- आठवां बड़ा मंगल
ज्येष्ठ मास में चार एकादशी व्रत पड़ेंगे जो 13 मई प्रथम ज्येष्ठ मास में अपरा एकादशी व्रत और 27 मई को कमला पुरूषोत्तमा एकादशी व्रत, वही 11 जून द्वितीय ज्येष्ठ मास में कमला पुरूषोत्तमा एकादशी व्रत और 25 जून को निर्जला एकादशी व्रत पढ़ेगा और प्रथम ज्येष्ठ मास में 16 मई को शनि अमावस्या शनिदेव की जयंती पड़ रही है, 21 मई और 18 जून को अतिशुभ गुरु पुष्य अमृत योग भी पड़ेगा*

पुरुषोत्तम मास का महात्म्य -
अधिक मास की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु (भगवान पुरुषोत्तम) ने इसे अपना नाम दिया और कहा है कि अब मै इस मास का स्वामी हो गया हूं। अब यह जगत पूज्य होगा और द्रारिद्रय का नाश करने वाला होगा। इस मास में नियमपूर्वक संयमित होकर भगवान विष्णु और शिव की पूजा करने से अलौकिक और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है तथा मृत्यु के बाद किसी प्रकार की अधोगति का भय नही होता है।

पुरुषोत्तम मास में करें ये काम -
पुराणों में अधिक मास में पूजन, व्रत, दान संबंधी विभिन्न प्रकार के नियम बताए गए हैं। इस मास में प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्यकर्म करके भगवान का स्मरण करना चाहिए। पुरुषोत्तम मास में श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ करना महान पुण्य दायक है और एक लाख तुलसी पत्र से शालिग्राम भगवान का पूजन करने से अनंत पुण्य मिलता है। अधिक मास की समाप्ति पर स्नान, जप, पुरुषोत्तम मास पाठ और मंत्र सहित या केवल भगवान का स्मरण कर गुड़, गेंहू, घृत, वस्त्र, मिष्ठान, केला, कूष्माण्ड (कुम्हड़ा), ककड़ी आदि ऋतुफल, मूली आदि वस्तुओं का दान करके भगवान को तीन बार अर्घ्य प्रदान करें।

भूलकर भी नहीं करें ये काम
अधिक मास में विवाह, यज्ञ, देव प्रतिष्ठा, महादान, चूड़ाकर्ण (मुंडन), पहले कभी न देखे हुए देवतीर्थो में गमन, नवगृह प्रवेश, वृषोत्सर्ग, संपत्ति, नई गाड़ी का क्रय आदि शुभ कार्यों का आरंभ नही करना चाहिए। इसके अतिरिक्त अन्य अनित्य और अनैमित्तिक कार्य जैसे नववधू प्रवेश, नव यज्ञोपवीत धारण, व्रतोद्यापन, नव अलंकार, नवीन वस्त्र धारण करना, कुआं, तालाब आदि का खनन करना आदि कर्मों को भी निषेध माना गया है।

अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार न हुए। ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया तो भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया। अधिकमास के अधिपति श्रीहरि भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरुषोत्तम मास नाम से पुकारा जाता है।

मान्यता है कि अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का 10 गुना अधिक फल मिलता है। इस माह यज्ञ-हवन का विशेष महत्व है। श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन इस माह विशेष रूप से फलदायी है। अधिक मास में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस माह दान का विशेष महत्व है। अधिक मास में दीपदान करना एवं धार्मिक पुस्तकों का दान करना शुभ माना जाता है। अधिकमास में भूमि पर शयन करना चाहिए। एक समय सात्विक भोजन करना चाहिए। इस मास में व्रत रखते हुए भगवान विष्णु का श्रद्धापूर्वक पूजन करना चाहिए। श्री रामायण का पाठ या रुद्राभिषेक का पाठ करना चाहिए। श्रीविष्णु स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। अधिकमास की शुक्ल एकादशी पद्मिनी एकादशी एवं कृष्ण पक्ष की एकादशी परमा एकादशी कहलाती हैं। इन एकादशियों के व्रत पालन से प्रसिद्धि प्राप्त होती है। पुरुषोत्तम माह में किसी भी प्रकार का व्यसन न करें।

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर.9756402981, 7500048250

Written by
Agraleaks Team

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