आगरालीक्स…गंगा दशहरा कल 24 जून को. जानिए स्नान का शुभ मुहूर्त. इस दिन दान पुण्य और मां गंगा की आराधना से 10 प्रकार के पापों का होता है नाश
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसलिए इस दिन को 'गंगा दशहरा' के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष 2026 में गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष (शुद्ध) की दशमी तिथि यानी कल 24 जून, बुधवार को पड़ रहा है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और मां गंगा की आराधना से 10 प्रकार के पापों का नाश होता है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की इसी दिन माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, इसलिए पवित्र नदियों में स्नान और दान का महापुण्य काल माना गया है। 'दशहरा' का अर्थ है दस पापों का हरण।इस वर्ष 2 गंगा दशहरा क्यो -
हिंदू पंचांग के अनुसार, जब भी किसी वर्ष में दो 'ज्येष्ठ' (जेठ) मास आते हैं (यानी एक सामान्य महीना और एक अधिक मास/मलमास), तो तिथियों में विस्तार के कारण कुछ प्रमुख व्रत और त्योहार दो बार पड़ सकते हैं। इससहैं।हले 25 मई 2026 को गंगा दशहरा ज्येष्ठ अधिकमास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया गया था।
शुभ योग -
इस चित्रा सुबह 07:45 बजे तक रहेगा, फिर स्वाति नक्षत्र पूरे दिन रहेगा। इसके अलावा इस दिन परिघ योग सुबह 06:30 बजे तक रहेगा उसके बाद शिव योग रहेगा।
स्नान का सर्वोत्तम समय -
ब्रह्म मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है। सामान्यतः ब्रह्म मुहूर्त 04:04 AM से 04:45 AM तक रहता है। यदि इस समय संभव न हो तो सूर्योदय के बाद 05:25 AM से 07:40 AM तक का समय विशेष पुण्यकारी है। दिनभर किसी भी समय गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
गंगा दशहरा पर दान का कई गुना फल मिलता है। गर्मी का समय होने से छाया और शीतलता देने वाली वस्तुएं दान करना श्रेष्ठ है।
दान योग्य सामग्री - जल से भरे घड़े, पंखे, छाते, चप्पल, वस्त्र, अनाज, फल, तिल, घी, दही, चीनी। प्लास्टिक की वस्तुओं का दान न करें।
किन 10 पापों से मिलती है मुक्ति -
कायिक पाप - शरीर से किए गए 3 पाप -
बिना दिए किसी की वस्तु लेना
हिंसा करना
परस्त्री गमन
वाचिक पाप - वाणी से किए गए 4 पाप -
कठोर बोलना
झूठ बोलना
चुगली करना
निरर्थक बातें करना
मानसिक पाप - मन से किए गए 3 पाप -
दूसरों का बुरा सोचना
दूसरों के धन का लालच
नास्तिक बुद्धि रखना
ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार मान्यता है कि गंगा दशहरा पर विधि-विधान से स्नान-दान और पूजन करने से इन दसों पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया कि जो श्रद्धालु गंगा स्नान इए लिए हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज या ऋषिकेश नहीं जा सकते, वे घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें और नियम से पूजा करें। इससे भी गंगा स्नान का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।
गंगा दशहरा पर गंगा स्नान महत्व
स्कंद पुराण के अनुसार - दशहरा नाम पापानां हरति इति दशहरा. गंगायां स्नानमात्रेण सर्वपापैः प्रमुच्यते॥
अर्थ: - दशहरा का अर्थ है “दस प्रकार के पापों का हरण करने वाला”. इस दिन गंगा में स्नान करने मात्र से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है.. गंगा जल को अमृत के समान माना गया है, जो आत्मा को शुद्ध करता है. इस दिन किए गए दान, जैसे जल, वस्त्र, अन्न आदि, कई गुना फल देते हैं।