आगरालीक्स…अपने माता—पिता के त्याग का सम्मान करें विद्यार्थी और अपनी शिक्षा को राष्ट्र निर्माण के लिए उपयोग करें. आगरा में राज्यपाल ने स्टूडेंट्स को बताया शिक्षा का महत्व..
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि के 92वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के संघर्ष, ज्ञान, आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि उनका संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो“ आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता या रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय द्वारा 79832 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं तथा 88 पदकों में से 64 पदक छात्राओं ने प्राप्त किए, जो बेटियों की प्रतिभा, परिश्रम और उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों का प्रमाण है। उन्होंने छात्राओं से आत्मविश्वास, सम्मान और व्यक्तित्व विकास को जीवन की प्राथमिकता बनाने तथा ऐसे जीवनसाथी के चयन की प्रेरणा दी जो उनका सम्मान करे। साथ ही अभिभावकों से बेटियों को उच्च शिक्षा के साथ जीवनोपयोगी कौशल एवं आत्मनिर्भरता के संस्कार देने का आग्रह किया।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से माता-पिता के त्याग का सम्मान करने, सकारात्मक सोच अपनाने, समाजहित में कार्य करने तथा अपनी शिक्षा का उपयोग नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समस्याओं के समाधान और राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता पद प्राप्त करने में नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा शिक्षा सुधारों के लिए एनसीटीई अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा जी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समय के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था एवं पाठ्यक्रम में बदलाव आवश्यक है। विश्वविद्यालय द्वारा नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता, इनक्यूबेशन, प्रयोगशाला से समाज तक की अवधारणा, आंगनवाड़ी, पोषण, स्वास्थ्य एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े कार्यों की भी उन्होंने प्रशंसा की।
राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों में अपार प्रतिभा होती है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने और उचित अवसर देने की है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन एवं विचारों पर आधारित अध्ययन, कविता, भाषण, चित्रकला तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की सराहना की तथा शिक्षकों से विद्यार्थियों की प्रतिभा को निरंतर निखारने का आग्रह किया। उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विद्यार्थियों के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यही प्रतिभाशाली युवा विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और संस्कारों पर बल देते हुए कहा कि व्यक्तित्व निर्माण केवल पुस्तकीय ज्ञान से नहीं, बल्कि परिवार, समाज और शिक्षकों के मार्गदर्शन से होता है। उन्होंने शिक्षकों द्वारा प्रेरणादायक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच विकसित करने के प्रयासों की सराहना की। मा0 राज्यपाल महोदया ने कहा कि भारत विज्ञान, अंतरिक्ष, रक्षा, खेल और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियाँ प्राप्त कर रहा है। गगनयान मिशन, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाडों में भारतीय विद्यार्थियों की सफलता तथा खिलाड़ियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन देश की युवा शक्ति की क्षमता का प्रमाण है।

विशिष्ट अतिथि एवं प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि आगरा वीरता, संस्कृति और गौरव की भूमि है, जहाँ से छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य का संदेश मिलता है तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर के समानता, शिक्षा एवं सामाजिक न्याय के विचारों को यह विश्वविद्यालय आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षा का अंत हो सकता है, किंतु शिक्षा का कभी अंत नहीं होता। उन्होंने पदक विजेताओं को बधाई देते हुए अन्य विद्यार्थियों से निराश न होने का आह्वान किया तथा कहा कि सतत प्रयास ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने संस्कारयुक्त शिक्षा, अभिव्यक्ति की मर्यादा, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत अभियान से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया।
"राष्ट्रीय शिक्षा नीति संस्कारित भारत का आधार" — प्रो. पंकज अरोड़ा
मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा कि विश्वविद्यालय का शताब्दी वर्ष केवल समय का पड़ाव नहीं, बल्कि गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ज्ञान एवं संस्कार का संतुलित मॉडल बताते हुए विद्यार्थियों से जीवनपर्यंत सीखते रहने, नवाचार अपनाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नैतिक उपयोग करने तथा राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को पाँच संदेश दिए—जीवन भर सीखते रहें, ऐसी सफलता चुनें जिससे राष्ट्र आगे बढ़े, नवाचार अपनाएँ, तकनीक के साथ नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ रखें तथा प्रत्येक कार्य में देश को सर्वोपरि मानें।