आगरालीक्स…रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ संयोग में 02 सितंबर को मनाई जाएगी हलछठ और बलराम जयंती. शेषनाग के अवतार भगवान बलराम का मनाया जाएगा जन्मोत्सव
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार भगवान बलराम का जन्मदिन मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाने वाला हलषष्ठी व्रत 2 सितंबर 2026, बुधवार को रखा जाएगा। इसे हलछठ, हरछठ और ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बुधवार है। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान करके पूजा की तैयारी करती हैं और दिनभर व्रत रखकर शाम के समय पूजा करती हैं। बलराम जी की पूजा के साथ इस दिन षष्ठी माता की पूजा भी की जाती है।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी की पूजा की जाती है। बलराम जी के हाथ में हल उनका प्रमुख अस्त्र है, इसी वजह से इस व्रत में हल से जुड़ी खेती और उससे पैदा होने वाले अन्न को भोजन में शामिल नहीं किया जाता है। हलषष्ठी पर माताएं संतान की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। कई जगह महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं, जबकि स्थानीय परंपरा के अनुसार व्रत के दौरान तिन्नी का चावल, महुआ और बिना जोती जमीन या जल में पैदा होने वाली चीजों का सेवन किया जाता है।
हलषष्ठी पर बन रहे हैं ये 3 शुभ योग –
2 सितंबर को हलषष्ठी के दिन ध्रुव योग रात 9:12 बजे तक रहेगा। इसके बाद व्याघात योग शुरू होगा। रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग 01 सितंबर की देर रात 1:43 बजे से 3 सितंबर की सुबह 6 बजे तक रहेंगे। इस दिन भरणी नक्षत्र रात 1:43 बजे तक रहेगा।
संतान सुख की कामना के लिए भी खास है हल षष्ठी –
हल षष्ठी का व्रत केवल संतान की लंबी उम्र और स्वास्थ्य तक सीमित नहीं माना जाता. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन दंपतियों को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ है, वे भी श्रद्धापूर्वक इस व्रत और भगवान बलराम की पूजा कर सकते हैं. मान्यता है कि इस दिन भगवान बलराम का स्मरण और पूजा करने से संतान संबंधी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है.
संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है व्रत –
हल षष्ठी का व्रत विशेष रूप से माताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख और प्रसन्नता की कामना से यह व्रत करती हैं. मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक हल षष्ठी का व्रत करने से भगवान बलराम का आशीर्वाद प्राप्त होता है. संतान के जीवन में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहे, इसी भावना के साथ माताएं इस दिन पूजा-पाठ करती हैं.
बच्चों को बांटा जाता है सतनाजा का प्रसाद –
हल षष्ठी की पूजा पूरी होने के बाद भुना हुआ सतनाजा बच्चों को प्रसाद के रूप में बांटने की परंपरा भी है. सतनाजा कई तरह के अनाज और अनाज से जुड़े पदार्थों का मिश्रण माना जाता है. इसे इस पर्व की पूजा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.