आगरालीक्स…इस बार की श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर द्वापर युग जैसा दुर्लभ महासंयोग. एक ही दिन स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव मनाएंगे कान्हा का जन्मदिन. 45 मिनट तक रहेगा जन्मोत्सव का शुभ समय
स्मार्त और वैष्णव मत के सभी मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा की जन्म आरती एक दिन एक समय पर मध्यरात्रि में 04 सितंबर को होगी। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इसका कारण विशेष रूप से बन रहे द्वापर जैसा कन्हैया के जन्म का दुर्लभ संयोग है। एक ही दिन भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी उदया से लेकर मध्यरात्रि के बाद तक रहेगी। साथ ही रोहिणी नक्षत्र एवं वृषभ राशि में चंद्रमा भी इस दिन रहने से पर्वकालीन अष्टमी तिथि एवं जयंती योग बन रहा है।
05 साल पहले भी एक ही दिन मना था जन्मोत्सव
30 अगस्त 2021, सोमवार – यही आखिरी बार था जब स्मार्त और वैष्णव दोनों संप्रदायों ने एक ही दिन जन्माष्टमी मनाई थी।
पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि का प्रारंभ 4 सितंबर को तड़के 2 बजकर 25 मिनट पर होगा. यह तिथि 5 सितंबर को 12 बजकर 13 मिनट तक मान्य रहेगी. जन्माष्टमी मध्य रात्रि के समय में मनाते हैं, इस आधार पर 16 कलाओं से युक्त योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण जी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर शुक्रवार को मनाई जाएगी. इस दिन व्रत रखा जाएगा और रात्रि के समय में जन्मोत्सव मनाया जाएगा. शास्त्र कहता है, जन्माष्टमी वही मान्य है जब मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि हो, जो इस साल 4 सितंबर को ही पड़ रही है। चंद्रमा 3 सितंबर सुबह 7:25 बजे वृषभ राशि में प्रवेश करेगा और 5 सितंबर सुबह 10:17 बजे तक वृषभ राशि में रहेगा। इस बार कालाष्टमी और श्रीकृष्ण जयंती (उपवास) का भी विशेष संयोग बन रहा है। धर्मशास्त्रों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। भविष्योत्तर पुराण में जन्माष्टमी व्रत की महिमा बताते हुए इसे करोड़ों एकादशी व्रत के समान फलदायी एवं ब्रह्मवैवर्त पुराण में जन्माष्टमी व्रत 100 जन्मों के पापों से मुक्ति प्रदान करने वाला बताया गया है।
जन्माष्टमी 2026 मुहूर्त –
इस साल जन्माष्टमी के लिए निशिता पूजा मुहूर्त 04 सितंबर रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होगा और 5 सितंबर को 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. ऐसे में जन्माष्टमी के लिए 45 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा.
द्वापर युग जैसा दुर्लभ महासंयोग – शुभ योग –
श्रीमद्भागवत और भविष्य पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि के चंद्रमा में अर्धरात्रि के समय हुआ था।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इस बार भी ठीक वही 4 योग एक साथ बन रहे हैं –
- अर्धरात्रि-व्यापिनी अष्टमी तिथि
- रोहिणी नक्षत्र : 4 सितंबर 00:29 AM से 11:04 PM तक रहेगा
- वृषस्थ चंद्रमा : रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेगा
- शुक्रवार का दिन : जो लक्ष्मी और प्रेम के कारक श्रीकृष्ण के लिए अत्यंत शुभ है।
जब रोहिणी नक्षत्र के बिना अष्टमी हो तो उसे ‘केवला’ और रोहिणी के साथ हो तो उसे ‘जयंती’ कहा जाता है। इस बार जयंती योग बन रहा है, जो जन्मांतर के पापों का नाश करने वाला माना गया है। पद्मपुराण के अनुसार इस योग में व्रत करने वाला अपने कोटि कुलों को मुक्त कर देता है।
जन्माष्टमी 2026 पारण समय –
इस बार जन्माष्टमी व्रत का पारण 5 सितंबर को सुबह 6 बजकर 1 मिनट से होगा. लेकिन आजकल कई स्थानों पर लोग श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद पारण करके व्रत को पूरा कर लेते हैं, उनके लिए पारण का समय 5 सितंबर को 12:43 Am पर है.