आगरालीक्स…अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में कल 04 सितंबर शुक्रवार मनाया जायेगा 16 कलाओ से युक्त योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व. जानिए शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 3 सितंबर की रात 2:25 बजे शुरू होकर 4 सितंबर की रात 12:13 बजे समाप्त होगी। इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र 3 सितंबर की रात 12:29 बजे शुरू होकर 4 सितंबर की रात 11:04 बजे तक रहेगा। यानी जन्माष्टमी के दिन उदयातिथि से लेकर रात तक रोहिणी नक्षत्र का संयोग बना रहेगा। इसलिए जन्माष्टमी का व्रत और जन्मोत्सव दोनो कल 4 सितंबर को ही मनाया जाएगा।
पंचांग और हिंदू गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में परम पुरुषोत्तम योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का 5253वाँ जन्मोत्सव (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) मनाया जा रहा है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का संयोग बन रहा है। कई बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि तो रहती है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बनता। इस बार दोनों एक ही दिन मिल रहे हैं। यही वजह है कि इस जन्माष्टमी को विशेष माना जा रहा है।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की इस बार स्मार्त (ग्रहस्थ) और वैष्णव (इस्कॉन/ भगवान कृष्ण) सहित सभी प्रमुख संप्रदाय कल 4 सितंबर को ही जन्माष्टमी मनायेंगे।
अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग –
जन्माष्टमी की अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि और उदयाकाल से लेकर रात 11 बजकर 4 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र का एक साथ होना विशेष फलदायी रहेगा। पिछले कई वर्षों में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर वृष राशि में चंद्रमा तो रहता है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पाता। इस बार अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि के चन्द्रमा के साथ प्रमुख ज्योतिषीय तत्व एक साथ आ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं में भी ऐसे संयोग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
शुभ मुहूर्त –
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूजा का शुभ समय 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से 5 सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
इस लगभग 46 मिनट की अवधि में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी व्रत का पारण अगले दिन 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे के बाद किया जा सकता है। आधुनिक परंपरा के अनुसार कुछ स्थानों पर जन्मोत्सव के बाद भी रात 12:45 के बाद भी पारण किया जाता है। इसलिए व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा अनुसार पारण करें।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
Whatsapp – 8272809774
