आगरालीक्स …आगरा में गूंजेगा ‘पंख दो परवाज दो, नारी को आकाश दो’ अगर आप भी बेटियों को समर्पित समाज की रचना देखना चाहते हैं तो 03 जनवरी को सुबह 10 बजे रेनबो हाॅस्पिटल पहुंचकर हमारी इस मुहिम का हिस्सा बनें।
बेटियों के अस्तित्व, शिक्षा और विकास के पक्ष में शहर के चिकित्सक दंपति डा. जयदीप मल्होत्रा और डा. नरेंद्र मल्होत्रा एक लम्बे अर्से से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। स्मृति संस्था और रेनबो हाॅस्पिटल की ओर से 03 जनवरी 2018 को ‘बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पर एक रैली आयोजित की जा रही है। बेटियों के रक्षा और शिक्षा के संकल्प को प्रबल बनाने को समर्पित इस रैली का आयोजन हर साल नववर्ष के आगाज पर किया जाता है। इसमें शहर भर के विद्यालयों से सैकड़ों की संख्या में छात्र्-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं, विभिन्न संस्थाओं से जुडे़ लोग, चिकित्सक और आम शहरवासी हिस्सा लेते हैं। रैली सुबह 11 बजे रेनबो हाॅस्पिटल प्रांगण से शुरू होकर गुरूद्वारा गुरू का ताल पर संपन्न होगी। इसके साथ ही सुबह 11 से अपराहन तीन बजे तक रेनबो हाॅस्पिटल में ही एक रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया जाएगा।
देश भर में मुहिम
‘पंख दो परवाज दो, नारी को आकाश दो’ के नारे के साथ वर्ष 2018 में फोग्सी के उस मंच से इस बार डा. जयदीप सामने हैं। लगभग 34000 चिकित्सकों के इस संगठन को लीड करते हुए डा. जयदीप न सिर्फ आगरा अपितु देश भर में बेटियों की घटती संख्या में सुधार और लोगों में जागरूकता लाने के लिए एक नए सिरे से यह अभियान शुरू करने जा रही हैं। 19 जनवरी 2018 को भुवनेश्वर में आयोजित एक समारोह में डा. जयदीप फोग्सी के अध्यक्ष पद की कमान संभाल लेंगी। फोग्सी के मुख्य एजेंडे और विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए वह देश भर में संदेश पहुंचाने की कोशिश करेंगी कि बेटियों का अनुपात बेटों से कम नहीं होना चाहिए। इसका आगाज आगरा से होगा। नए साल की शुरूआत बेटियों के लिए समर्पित होगी। तीन जनवरी को बच्चे, युवा और बुजुर्ग एक साथ एक मंच और एक स्वर में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढाओ’ के लिए आवाज उठाएंगे। सिकंदरा स्थित रेनबो हाॅस्पिटल से गुरूद्वारा गुरू का ताल तक सैकडों लोग अपने हाथों में बेटियों के अस्तित्व, उनकी शिक्षा, विकास और सुरक्षा के पक्ष में स्लोगन लिखीं तख्तियां, बैनर आदि हाथ में लेकर दौडते नजर आएंगे। नए साल पर हर साल यह रैली समाज को यह स्मरण कराने के उद्देश्य से निकाली जाती है कि बेटियों के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर हम अभी अपने लक्ष्य तक पहुंचे नही हैं। हमें अभी और मेहनत करनी है और तब तक चलते रहना है जब तक लोग बेटों की तरह दुआओं में बेटियां न मांगने लगें। आम जनता को भी इस समारोह में आमंत्रित किया गया है।