आगरालीक्स… राजस्थान सरकार ने जयपुर रियासत की 100 बीघा जमीन, दो कोठियां, सदाशिव मन: कामेश्वर से जुड़ा क्षेत्र और सड़क की पट्टी पर मालिकाना हक मांगा है। इसी जमीन पर बनी है जयपुर हाउस कॉलोनी और सरकारी कार्यालय।
राजस्थान सरकार ने 1952 में हुए ऐतिहासिक विलय समझौते के आर्टिकल 6 (2) सी के आधार पर कहा है कि इस समझौते में यह प्रावधान है कि पूर्ववती जयपुर रियासत की संपत्तियां राज्य के बाहर स्थित हैं उन पर राजस्थान राज्य का अधिकार होगा। इसके अनुसार, आगरा के जयपुर हाउस क्षेत्र में दो ऐतिहासिक कोठियां, 100 बीघा जमीन, सदाशिव मन: कामेश्वर मंदिर से जुड़ा क्षेत्र और सड़क की एक प्रमुख पट्टी जयपुर रियासत की हैं। राजस्थान सरकार ने आगरा सहित प्रदेश की अन्य संपत्तियां जो जयपुर रियासत की हैं उन पर मालिका हक के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखा है।
खंगाले जा रहे पुराने रिकार्ड
एडीए, नगर निगम की टीमें पुराने अभिलेखों को खंगाल रही हैं। इसमें देखा जा रहा है कि जयपुर रियासत की जमीन की पिछले 70 वर्षों में बिक्री हुई है, वर्तमान में भू उपयोग क्या है। इसमें से जयपुर हाउस की जमीन पर नगर महापालिका ने 350 प्लाट काटे थे ऐसे में जमीन ट्रांसफर के अभिलेखों की भी तलाश की जा रही है। इसी जमीन पर एडीए का कार्यालय भी है। एडीएम प्रशासन आजाद भगत सिंह का मीडिया से कहना है कि राजस्थान सरकार की ओर से जयपुर रिसायत की संपत्तियों के अधिकार को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी गई है। एडीए और नगर निगम से अभिलेख मांगे गए हैं। उसके आधार पर शासन को अवगत कराया जाएगा। सहायक नगर आयुक्त का मीडिया से कहना है कि जयपुर हाउस और उसके आस पास की संपत्तियों के विशय में ब्रिटिश कॉलोनी और आजादी के बाद के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
ये है मामला
1945 में आगरा, कानपुर सहित अन्य शहरों में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट बनाए गए थे, 1959 में नगर महापालिका के गठन के बाद इनका विलय कर दिया गया।
1973 में नगर महापालिका द्वारा जयपुर हाउस कॉलोनी को बसाया गया, इसमें 350 प्लाट काटे गए