आगरालीक्स… आगरा में घुटने के जोड़ प्रत्यारोपण जैसे जटिल ऑपरेशन से बचना है तो प्रारम्भिक स्थित में ही यूनीकम्पार्टमेंट सर्जरी करा लेनी चाहिए। इस सर्जरी के लगभग 20 वर्ष तक घुटने के प्रत्यारोपण की आवश्यकता नहीं होती। इस ऑपरेशन के बाद आप दौड़ लगाने से लेकर आलती पालती मारकर भी बैठ सकते हैं। जबकि लापरवाही बरतने पर कुछ माह में ही तीनों कम्पार्टमेंट खराब होने से (कार्टिलेज खत्म होने के कारण) घुटने का प्रत्यारोपण कराने की नौबत आ जाती है। कार्टिलेज खत्म होने पर दवाएं भी असर नहीं करती। इसका इलाज सिर्फ प्रत्यारोपण ही है। यह जानकारी मुम्बई के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण मुल्लाजी ने होटल जेपी में आयोजित आगरा आर्थोपेडिक सोसायटी द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय जोड़ प्रत्यारोपण कार्यशाला में दी।
बताया कि यदि 3-6 हफ्ते तक घुटनों में दर्द हो, उठने बैठने व सीढ़िया चढ़ने में परेशानी हो तो डड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। एक बार कार्टिलेज खत्म होने पर उसका निर्माण दोबारा नहीं होता। इसके दोबारा निर्माण के लिए दुनिया भर में काफी स्टेम सेल, पीआरपी इंजेक्शन जैसे कई शोध चल रहे हैं। घुटने व कूल्हे के प्रत्यारोपण में कम्प्यूटर व रोबोट सर्जरी से जटिल मामले काफी आसान हो गए हैं। डॉ. मुल्लाजी ने प्रत्यारोपण के बाद आने वाली समस्याओं में रिवीजनल सर्जरी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आने वाले 20 वर्षों में दुनिया में रिवीजनल सर्जरी लगभग 600 प्रतिशत बढ़ जाएंगी। इसलिए प्रत्यारोपण के लिए विशेषज्ञों की अच्छी ट्रेनिंग बहुत आवश्यक है।
दिल्ली एम्स के पूर्व अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यभान ने बताया कि घुटने के प्रत्यारोपण में पहला ऑपरेशन बहुत महत्वपूर्ण है। कार्यशाला में डॉ. अनिल अरोरा, डॉ. केबी अत्री, डॉ. अमित पंकज, डॉ.अमन दुआ, चेन्नई के डॉ. बालाजी के अलावा लखनऊ, कानपुर, बरेली, अलीगढ़, झांसी के विशेषज्ञों ने भी व्याख्यान दिया। अतिथियों का स्वागत कार्यशाला के आयोजन अध्यक्ष डॉ. अनूप खरे व धन्यवाद ज्ञापन सचिव डॉ. अमृत गोयल ने दिया। जोड़ प्रत्यारोपण पर आठ अलग-अलग शहरों से विशेषज्ञों ने जटिल केस प्रजेन्ट किए।
दीप प्रज्ज्वलित कर किया कार्यशाला का उद्घाटन
आगरा आर्थोपेडिक सोसायटी द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय जोड़ प्रत्यारोपण कार्यशाला का शुभारम्भ एम्स दिल्ली के हड्डी रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यभान, यूपी आर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अतुल श्रीवास्तव, सचिव डॉ. आशीष कुमार, आगरा आर्थोपेडिक एसोसिएसन के अध्यश्र डॉ. अशोक विज, सचिव डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ आयोजन अध्यक्ष डॉ. अनूप खरे व सचिव अमृत गोयल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संचालन डॉ. अश्वनि सडाना ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. सीपी पाल, डॉ. संजय धवन, डॉ. कार्तिक प्रूर्थी, डॉ. अरुण कपूर, डॉ. विपुल अग्रवाल, डॉ. रवि सभरवाल, डॉ. संजय चतुर्वेदी उपस्थित थे।
अब 20-25 वर्ष तक चलेगा घुटने व कूल्हे का प्रत्यारोपण
आगरा। मैटिल के बजाय अब आक्सीनियम व सिरेमिक से निर्मित कूल्हे के प्रत्यारोपण के बाद 20-25 वर्ष तक की लम्बी अवधि तक चलेंगे। विशेषज्ञों ने बताया कि पहले मैटिल से बने कूल्हे प्रत्यारोपण के बाद लगभग 15 वर्ष तक चलते थे। लेकिन अब आक्जीनियम व सिरेमिक के घुटने प्रत्यारोपित किए जा रहे हैं। जो 20-25 वर्ष तक काम करते हैं। आयोजन सचिव व एसएन मेडिकल कॉलेज के सह आचार्य डॉ. अमृत गोयल ने होटल जेपी में आयोजित राज्य स्तरीय जोड़ प्रत्यारोपण कार्यशाला में बताया कि अब अच्छे से अच्छे घुटने का प्रत्यारोपण 60-65 हजार में सम्भव है। जिसकी कीमत पहले एक से डेढ़ लाख के करीब थी।