आगरालीक्स… आगरा के न्यूरोसर्जन डॉ आरसी मिश्रा ने कहा कि आप भूल जाते हैं, यह मेमोरी लॉस नहीं मैमोरी फ्लाॅस है, उन्होंने कहा कि असल में हम मल्टीटास्किंग हो गए हैं। जब हम एक बार में एक से अधिक काम करने लगते हैं तो सबसे जरूरी काम पर ही फोकस करते हैं। ऐसे में दूसरी चीजें कुछ समय के लिए हमारे दिमाग से निकल सकती हैं।
बढ़ती उम्र के साथ हमें महसूस होने लगता है कि हम कई तरह की समस्याओं से घिरते जा रहे हैं। इन्हीं में से एक है भूलना। कभी हम अपने ही हाथों से कहीं सामान रखकर भूल जाते हैं, कभी फ्रिज खोलते हैं और ये भूल जाते हैं कि क्या निकालने के लिए फ्रिज खोला है, चश्मा सिर पर होता है और पूरे घर में उसे छान मारते हैं। यहां तक कि यह याद नहीं रहता कि घर का डोर बंद किया या नहीं। महिलाओं के साथ यह आम है। इन्हीं सब बातों को लेकर महिलाओं को विस्तार से जानकारी दी वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डा. आरसी मिश्रा ने।
क्लब 35 प्लस द्वारा दिनांक सोमवार शाम 4ः00 बजे से गांधी नगर स्थित उद्युपी रेस्टोरेंट में ‘हम चीजों को क्यों भूल जाते हैं‘ विषयक गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें मुख्य वक्ता वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डा. आरसी मिश्रा ने महिलाओं को मस्तिष्क संबंधी कई ऐसी बातें बताईं जो उम्र के एक पड़ाव पर उनके जीवन को सुगम बनाने में मददगार साबित हों। डा. मिश्रा ने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ कई चीजें आम होती हैं, जिन्हें हम रोग समझ लेते हैं। मसलन कुछ सामान कहीं रखकर भूल जाना या इसी तरह की और चीजें। हम समझते हैं कि हमें भूलने की बीमारी हो गई है, जबकि ऐसा नहीं है। असल में हम मल्टीटास्किंग हो गए हैं। जब हम एक बार में एक से अधिक काम करने लगते हैं तो सबसे जरूरी काम पर ही फोकस करते हैं। ऐसे में दूसरी चीजें कुछ समय के लिए हमारे दिमाग से निकल सकती हैं। इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है कि हमें भूलने की आदत हो गई है।
यह मेमोरी लॉस नहीं मैमोरी फ्लाॅस है
महिलाओं की इस दुविधा को दूर करने का एक आसान तरीका है डा. मिश्रा ने बताया कि जब हम खुद यह कहें कि हमें भूलने की बीमारी है तो समझ लीजिए कि आपको यह रोग नहीं है, लेकिन जब दूसरे इसी बात को कहने लगें तब आपको चिंता करने की जरूरत जरूर है, क्योंकि इस बात से प्रभावित हमारे परिवारीजन अधिक होते हैं कि हम चीजों को भूलने लगे हैं। उन्हें ही हमसे पहले हमारे बारे में इस समस्या का अहसास होता है। इसे मैमोरी लाॅस नहीं बल्कि मैमोरी फ्लाॅस कहा जा सकता है। उन्होंने इसे ट्रांजियंस, एप्सेंट माइंडिडनेस, ब्लाॅकिंग, मिस इंटरट्यूशन की कई श्रेणियों में मेडिकल साइंस की भाषा में विभाजित किया।

डा. आरसी मिश्रा ने कहा कि ऐसा नहीं है कि हमें इसके लिए किन्हीं विशेष दवाओं की आवश्यकता है। काउंसलिंग तो इन हालातों को सुधारने का बेहतर तरीका है ही, इसके अलावा मल्टीटास्किंग में दिमाग को ट्रेंड करना जैसे ट्रेडमिल पर वाॅक करते समय गाने सुनना या कुछ पढ़ते रहना, पजल करना, ध्यान लगाना, योग करना याद्दाश्त को मजबूत करने के कुछ बेहतर तरीके हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आप खुद को ऐसे ट्रेंड कर लें कि आप आशक्त न हों। अगर आशक्ति नहीं होगी तो आपको चिड़चिड़ाहट और आगे चलकर तनाव नहीं होगा। इसके विपरीत कई ऐसी चीजों को भूलना जिन्हें आप कभी नहीं भूल सकते, यह भूलने की बीमारी हो सकती है। जैसे स्नाइल डिमेंशिया या अल्जाइमर।

विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद डीआईजी लव कुमार की धर्मपत्नी शक्ति सिंह जी ने कहा कि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास समय की कमी है। ऐसे में फिट रहने के लिए घंटों जिम में पसीना बहाकर एक्सरसाइज करना सभी के लिए संभव नहीं हो पाता। इसमें भी महिलाओं को तो घर के काम भी करने होते हैं। लेकिन यह भी सच है कि अगर हम व्यायाम को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं तो याद्दाश्त को मजबूत कर सकते हैं। ध्यान और योगा भी इसमें काफी मददगार हैं। साथ ही टीवी और मोबाइल का इस्तेमाल भी एक सीमा तक ही अच्छा है।
वक्ताओं में सीनियर डायटीशियन डा. रेणुका डंग ने कहा कि तेज दिमाग के लिए नियमित खान-पान और नियमित दिनचर्या जरूरी है। ये तो सभी जानते हैं कि खान-पान का असर हमारे शरीर पर पड़ता है, लेकिन शायद यह भूल जाते हैं कि हमारे खान-पान का असर हमारी याद्दाश्त पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कहीं न कहीं फैशन की तरह ही हमें खान-पान की चीजें भी सुंदरता के आधार पर अच्छी लगने लगी हैं। अगर कोई खाने की वस्तु अच्छी पैकिंग में दिख जाए तो हम बिना उसके बारे में जाने ही उसे अच्छा समझने लगते हैं। इसके विपरीत कुदरती खाद्य पदार्थों से हमारा ध्यान हटता जा रहा है।
क्लब 35 प्लस कीं अध्यक्ष अशु मित्तल ने कहा कि हमारा क्लब आगरा में 35 से अधिक आयु वर्ग की महिलाओं में स्वास्थ्य-आयु संबंधी व अन्य शारीरिक परिस्थितिजन्य समस्याओं के समाधान एवं उनकी जीवनशैली को सुगम बनाने के लिए समर्पित है। प्रायः देखा गया है कि बढ़ती उम्र में अपने दैनिक जीवन में महिलाएं चीजों को भूलने की समस्या से जूझती हैं। बढ़ती उम्र में कमजोर याद्दाश्त होना सुगम जीवन यात्रा में एक गति अवरोधक का कार्य करता है। ऐसे में विशेषज्ञों ने महिलाओं को गोष्ठी में जो बताया वह निश्चित ही लाभकारी साबित होगा। संचालन मीनाक्षी मोहन, मोनिका अग्रवाल ने किया।