आगरालीक्स …आगरा में महाशिव रात्रि पर भोले नाथ दुल्हा बनेंगे, शहर के शिवालयों में भव्य आयोजन होगा। देखे आगरा के शिवलयों के आयोजन।
आगरा के चारों कानों पर शिवालय हैं, श्री मनकामेश्वर और रावली महादेव शहर के मध्य में है।
5 साल पुराने कैलाश मंदिर में दो शिव लिंग स्थापित हैं। मंदिर के मठ महंत महेश गिरि ने बताया कि कैलाश महादेव की स्थापना भगवान परशुराम और उनके पिता जमद्गिनी द्वारा की गई बताई जाती है।
बल्केश्वर नाथ महादेव का दरबार शहर के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है। महंत सुनील कांत नागर के मुताबिक मंदिर का सही नाम बिल्वकेश्वर नाथ महादेव है। यह करीब 700 वर्ष पुराना है। पहले यहां बेल के वृक्षों का जंगल था। बिल्वकेश्वर नाथ महादेव बेल वृक्ष के जड़ से प्राकट्य हैं।

प्राचीन पृथ्वीनाथ मंदिर पृथ्वी के गर्भ से अवतरित हुआ था। शताब्दियों पहले खोदाई में अनूठे शिव लिंग सहित इसके चारों खंभे पृथ्वी के गर्भ से निकले थे। श्रीकृष्ण जी ने जहां जहां लीला रचाई वहां शिव जी दर्शन को जाते थे। इसलिए पृथ्वीनाथ महादेव की प्रतिमा द्वापर युग की बताई जाती है।
राजेश्वर मंदिर का इतिहास करीब 850 से 900 वर्ष पुराना बताया जाता है। राजा खेड़ा का एक सेठ नर्मदा नदी के समीप से बैलगाड़ी से शिव लिंग स्थापित करने के लिए ले जा रहा था। वर्तमान मंदिर स्थल के पास एक कुंआ था, वहां वह विश्राम के लिए रुका। आराम के दौरान उसे शिवजी ने सपना दिखाया कि उनको वहीं स्थापित कर दिया जाए। लेकिन सेठ माना नहीं और शिवलिंग ले जाने की कोशिश करने लगा पर शिवलिंग वहां से हिला नहीं और शिवलिंग को यहीं स्थापित कर दिया गया
श्री मनकामेश्वर का महादेव का मंदिर है। बालकृष्ण के दर्शन करने जाते समय भगवान शिव यहां आए थे। उन्होंने बालकृष्ण के दर्शन की मनोकामना की थी। तभी से भगवान का नाम मनकामेश्वर हो गया। इसी प्रकार रावली महादेव मंदिर भी शहर का प्राचीन मंदिर है। अंग्रेजों ने यहां रेलवे लाइन बिछाने के लिए मंदिरों को शिफ्ट करने का प्रयास किया था लेकिन वहां मंदिर को नहीं हटा सके। उल्टा रेलवे लाइन को शिफ्ट किया गया। रावली मंदिर पर रेलवे लाइन में बड़ा मोड़ है।