आगरालीक्स… आगरा में पैरालाइसिस लकवा से पीडित बुजुर्ग मरीज अपने पैरों पर खडे हो रहे हैं, न्यूरोफिजिशियन डॉ राबिन बंसल की कास्प थैरेपी से स्ट्रेचर पर आ रहे मरीज पैरों से चलकर जा रहे हैं।
न्यूरोफिजिशियन डॉ राबिन बंसल (डीएम, एसजीपीजीआई लखनऊ) बताते हैं कि स्ट्रोक यानी पैरालाइसिस, लकवा यह एक बडी समस्या बन गई है। 60 साल की उम्र के बाद ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहने, मधुमेह और तनाव के कारण स्ट्रोक के मामले बढ रहे हैं। इस तरह के केस में पहले चार घंटे अहम होते हैं। इस दौरान सीटी स्कैन कराया जाता है, दिमाग में खून का थक्का जमा है तो एक इंजेक्शन दिया जाता है, इससे मरीज ठीक हो जाता है। मगर, अधिकांश केस में बुजुर्ग मरीजों की आवाज में बदलाव, एक हिस्से के काम करना बंद कर देने की समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। यह स्ट्रोक के प्रारंभिक लक्षण होते हैं, इससे मरीज पैरालाइज्ड हो जाता है, वह अपने पैरों पर खडा नहीं हो सकता। इसे लाइलाज समझकर लोग इलाज नहीं कराते हैं।
छह से आठ महीने में चलने लगते हैं मरीज
न्यूरोफिजिशियन डॉ राबिन बंसल ने बताया कि एसजीपीजीआई में डीएम करते समय पैरालाइसिस के मरीजों के लिए कास्प थैरेपी तैयार की गई थी, इस थैरेपी में मरीज को व्यायाम करने के लिए बताए जाते हैं, वह अपने घर पर व्यायाम कर सकता है और कुछ दवाएं दी जाती हैं, इससे छह से आठ महीने में मरीज अपने पैरों पर चलने लगता है।
100 से ज्यादा मरीजों में सफल रही कास्प थैरेपी
न्यूरोफिजिशियन डॉ राबिन बंसल ने बताया कि वे आगरा में 100 मरीजों पर कास्प थैरेपी इस्तेमाल कर चुके हैं, इन मरीजों में पहले महीने से ही अंतर आने लगता है, इससे इनके अंदर आत्मविश्वास बढता है और छह से आठ महीने में मरीज चलने लगते हैं।
डॉ राबिन बंसल
डीएम, एसजीपीजीआई लखनऊ
केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड खंदारी, आगरा क्रांसिंग के पास
फ़ोन: 9456091370