आगरालीक्स…(20 May 2021 Agra) एक घर में दो से तीन बच्चे और फोन एक..सबकी आनलाइन पढ़ाई, टाइम सभी का एक. किस्तों और कर्ज पर फोन ले रहे पेरेंट्स
दयालबाग के रहने वाले सूर्य प्रताप सिंह का कहना है कि मेरे दो बच्चे हैं और दोनों बच्चों की आनलाइन पढ़ाई का समय एक ही है. ऐसे में मुझे मुझे एक एक्स्ट्रा स्मार्ट फोन खरीदना पड़ा है. मैंने ये फोन ईएमआई पर खरीदा है क्योंकि इकट्ठा कैश कैसे दें, अभी बच्चों की स्कूल फीस भरी है. क्या करें बच्चों की पढ़ाई बेहद जरूरी है.
लॉयर्स कॉलोनी के रहने वाले जितेंद्र कुमार का कहना है कि पिछले साल मेरे दो बच्चे आनलाइन पढ़ाई पढ़े थे. इस साल सबसे छोटी बेटी भी पहली क्लास में आई है. लेकिन कोरोना के कारण उसकी पढ़ाई भी आनलाइन कर दी गई है. ऐसे में तीन—तीन बच्चों के लिए तीन स्मार्ट फोन जरूरत बन गया है. हालांकि हम अभी दो ही बच्चों की आनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं. तीसरे बच्चे के लिए अभी सोच रहे हैं कि कैसे उसकी पढ़ाई मैनेज की जाए.
सदर के रहने वाली मंजू गुप्ता का कहना है कि मेरे पति फैक्ट्री में काम करते हैं. पिछले साल तो काम बंद रहा लेकिन इस साल काम उनका चालू है लेकिन दो बच्चों के लिए दो फोन ख्ररीदना हमारे बजट से पूरी तरह से बाहर है. दोनों बच्चों की हाल ही में फीस जमा कराई है. ऐसे में दो फोन कैसे खरीदें. स्कूल में एक बच्चे की पढ़ाई आनलाइन नहीं चल रही है.
मोबाइल और लैपटॉप बने जरूरी
पिछले सवा साल से बच्चे आनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं. क्लास और ब्लैक बोर्ड की जगह मोबाइल और लैपटॉप ने ले ली है. पिछली साल की तरह ये सेशन भी आनलाइन ही चल रहा है. बच्चों की इस आनलाइन पढ़ाई के लिए फोन होना बहुत जरूरी है और वो भी स्मार्ट फोन. स्मार्ट फोन होगा तभी उनकी आनलाइन पढ़ाई संचालित हो सकती है. ऐसे में पिछले साल की तरह इस साल भी वो पेरेंट्स सबसे अधिक परेशान हैं जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है. एक घर में दो से तीन बच्चे हैं और सभी की आनलाइन पढ़ाई चल रही है. इनकी पढ़ाई का समय भी एक ही है. ऐसे में जिनके घर में एक फोन है उन्हें अपनी तीनों बच्चों की पढ़ाई के लिए परेशान होना पड़ रहा है.
कर्ज और किस्तों पर ले रहे फोन
पेरेंट्स किसी भी सूरत में बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं करना चाहते, ऐसे में वे बच्चों के लिए मोबाइल फोन और लैपटॉप खरीद रहे हैं. कई पेरेंट्स तो ऐसे हैं जो कि किस्तों पर मोबाइल खरीदने को मजबूर हैं. इसके अलावा कई पेरेंट्स कर्ज लेकर भी बच्चों की आनलाइन पढ़ाई जारी रखने के लिए मजबूर हैं. पेरेंट्स का कहना है कि पिछले साल भी बच्चों की आनलाइन पढ़ाई रही और इस साल भी. बच्चों की पढ़ाई जरूरी है, ऐसे में उनके लिए फोन खरीदना हमारी मजबूरी बन गई है.
स्कूलोें ने बढ़ाई है फीस
पिछले सेशन में स्कूलों ने फीस नहीं बढ़ाई थी. कई स्कूल ऐसे भी थे जिन्होंने एक से दो महीने की फीस माफ भी की थी. लेकिन इस सेशन की शुरुआत से ही फीस में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी स्कूलों द्वारा पहले से ही कर दी गई है. इसके अलावा स्कूल वाले अभी से स्कूल फीस जमा करने की बात कह रहे हैं.