आगरालीक्स…आगरा में रेनबो वेलनेस के हेल्थ कैंप में 75 से अधिक मरीजों की हुई जांच. डॉक्टर निहारिका ने कहा— गर्भधारण से पहले माइक्रो न्यूट्रिएंट्स जरूरी…
रेनबो वेलनेस की ओर से मंगलवार को आयोजित हेल्थ कैंप में 75 से अधिक मरीजों की नि:शुल्क जांच की गई। यह शिविर विशेष रूप से कॉस्मेटोलॉजी और क्रॉनिक पेन मैनेजमेंट से जुड़ी समस्याओं के निदान पर केंद्रित था। रेनबो वेलनेस की एमडी एवं वरिष्ठ स्त्री-रोग विशेषज्ञ डॉ. निहारिका मल्होत्रा ने बताया कि शिविर में फेस एनालाइज़र टेस्ट और एसयूआई चेयर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जो विशेष रूप से मूत्र रिसाव जैसी समस्याओं के उपचार में सहायक हैं।कॉस्मेटोलॉजी से जुड़ी समस्याओं जैसे मुहांसे, डार्क सर्कल्स, झुर्रियां, एंटी-एजिंग, अनचाहे बाल, मेलाज़्मा, पिग्मेंटेशन, बाल झड़ना आदि के लिए मरीजों को आधुनिक उपचार विधियों से अवगत कराया गया। वहीं, क्रॉनिक पेन मैनेजमेंट के अंतर्गत सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, पीठ-दर्द, सायटिका, एड़ी का दर्द जैसे जीवनशैली से जुड़े पुराने दर्दों के लिए विशेषज्ञों ने परामर्श दिया। इस अवसर पर दो डॉक्टर शिवालिका शर्मा और डॉक्टर कुमार आनंद तिवारी ने परामर्श दिया।
सीएमई में गर्भावस्था से पहले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पर हुई चर्चा
रेनबो आईवीएफ और स्मृति संस्था द्वारा आयोजित एक विशेष सीएमई में गर्भावस्था से पहले माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (सूक्ष्मपोषक तत्वों) के महत्व पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भधारण से पहले ही आयरन, फोलेट, विटामिन डी, बी12 और आयोडीन जैसे पोषक तत्वों की कमी को दूर करना मां और शिशु दोनों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निहारिका मल्होत्रा ने बताया कि प्रजनन आयु की अधिकांश महिलाओं में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होती है, जो न केवल प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि भ्रूण के विकास और प्लेसेंटा निर्माण में भी बाधा बन सकती है। गर्भधारण से पहले इन कमियों को पूरा करने से शरीर गर्भावस्था के लिए बेहतर ढंग से तैयार होता है।
गर्भावस्था के शुरुआती 3-4 हफ्तों में ही न्यूरल ट्यूब का निर्माण होता है, जबकि अक्सर महिलाओं को इस दौरान गर्भवती होने का पता भी नहीं होता। फोलिक एसिड की पर्याप्त मात्रा लेने से न्यूरल ट्यूब दोष (जैसे स्पाइना बिफिडा) का खतरा 70% तक कम हो जाता है। आयरन, विटामिन डी और आयोडीन की कमी से गर्भपात, समय से पूर्व प्रसव या शिशु के मानसिक विकास में कमी जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
प्रजनन क्षमता बढ़ाने में मददगार
डॉ. मल्होत्रा के अनुसार, जिंक, सेलेनियम, विटामिन सी, ई और फोलेट जैसे पोषक तत्व अंडाणु की गुणवत्ता, हार्मोन संतुलन और एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा को बढ़ाकर प्रजनन क्षमता में सुधार करते हैं। गर्भधारण की योजना बनाने वाली महिलाएं पहले से ही संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर दें। नियमित जांच कराकर पोषक तत्वों की कमी का पता लगाएं। आयरन की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करें।
यह छोटे-छोटे उपाय मां और बच्चे दोनों के लिए लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य की नींव रख सकते हैं।
इस अवसर पर एमडी एवं प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नरेंद्र मल्होत्रा और रेनबो आईवीएफ की एमडी डॉक्टर जयदीप मल्होत्रा समेत स्टाफ के कई सदस्य मौजूद रहे।