आगरालीक्स…आगरा में माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिवस पर पीढ़ियां दर पीढ़ियां सामंजस्य कैसे बिठाया जाए, इस पर चर्चा की गई. साथ ही नाटक की प्रस्तुति की गई
आगरा में मंगलवार को माहेश्वरी वंशोत्पत्ति दिवस पर महेश नवमी के अवसर पर सुबह सात भोलेनाथ की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद द्वारकापुरम से शोभायात्रा शुरू हुई यह, सुल्तानगंज की पुलिया, धवन अर्थों केयर हॉस्पिटल के पास से प्रारंभ होकर विजय नगर कालोनी होते हुए विजय क्लब पर संपन्न हुई। शाम को सूरसदन में गणेश वंदना के साथ महेश वंदना की गई. इसके साथ ही माहेश्वरी समाज में तीन पीढ़ियों के आपसी सामंजस्य पर चर्चा की गई. ऐसे परिवार जिनकी तीन पीढ़ियां थीं, उन्होंने अपने अनुभव साझा किए. संदेश दिया कि एक साथ परिवार मिलकर रहें तो वह हर क्षेत्र में तरक्की कर सकते हैं. एक दूसरे का सुख दुख में साथ दे सकते हैं.मुख्य अतिथि डॉ. संजय माहेश्वरी कैंसर सर्जन गोरखपुर, विशिष्ट अतिथि डॉ. रेखा माहेश्वरी ने कैंसर के लिए जागरूक किया. जिला माहेश्वरी सभा के जिलाध्यक्ष अनिल चांडक, मंत्री मनोज दुजारी, माहेश्वरी युवा संगठन के अध्यक्ष आदित्य टावरी व शरद माहेश्वरी मौजूद रहे।
ऐसे अस्तित्व में आया माहेश्वरी समाजकिंवदंतियों के अनुसार, राजा खंडेलसन को सुजानसेन नाम के एक पुत्र का आशीर्वाद मिला, जब उन्होंने भगवान शिव की अत्यंत भक्ति और समर्पण के साथ पूजा की। महेश नवमी से जुड़ी एक और कहानी यह है कि एक बार कई शिकारियों ने आश्रम पर हमला किया और ऋषियों को परेशान किया। शिकारियों के इस कृत्य से ऋषियों ने क्रोधित होकर उन्हें पत्थर होने का श्राप दे दिया। बाद में, उन शिकारियों की पत्नियों ने श्राप से छुटकारा पाने के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की। भगवान शिव इस शर्त पर उनकी मदद करने के लिए सहमत हुए कि उन्हें शिकार करना बंद करना होगा और खुद को किसी अन्य काम में शामिल करना होगा। महिलाओं ने शर्त मान ली और फिर सभी शिकारियों को बचा लिया गया। शिकारियों ने अन्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित किया और उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति दिखाने के लिए भगवान महेश के नाम पर अपने समुदाय का नाम माहेश्वरी समुदाय रखा। तब से यह माना जाता है कि भगवान शिव समुदाय के पूर्वजों के तारणहार थे।