आगरालीक्स…आगरा की सदर तहसील में सिर पर पीली पोटली में लाखों हस्ताक्षरों की थाती लेकर पहुंचे सनातनी. एक ही मांग—गौ माता को राष्ट्र माता किया जाए घोषित
सोमवार को पचकुइयां स्थित शिक्षा भवन से सैकड़ों गौ-भक्तों का काफिला सीताराम-राधे श्याम का संकीर्तन करते हुए निकला, तो राहगीरों की नजरें ठहर गईं। अवसर था गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत एसडीएम सदर को ज्ञापन सौंपने का, लेकिन यह महज एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनी दिलों की धड़कन का जीवंत प्रदर्शन था। आगरा जिले के सुदूर क्षेत्रों से लोग सुबह से ही ट्रैक्टर बस और अपने निजी वाहनों में एकत्रित होकर उत्साह का ज्वर लिए सदर तहसील पहुंचे।भक्ति और गरिमा का अद्भुत दृश्य: 'जैसे निकल रही हो श्रीमद्भागवत की शोभायात्रा-
पूरी रैली में जो सबसे हृदयस्पर्शी दृश्य था, वह था उन लाखों हस्ताक्षरों का सम्मान। पिछले तीन महीनों में आगरा जनपद के कोने-कोने से जुटाए गए लाखों लोगों के हस्ताक्षरों को पीले वस्त्रों में बांधकर, गौ-भक्त किसी पवित्र ग्रंथ की भांति अपने सिर पर धारण कर चल रहे थे। श्रद्धा का यह आलम था कि हर कदम पर 'गौ माता-राष्ट्र माता' के गगनभेदी नारे हवाओं में जोश भर रहे थे। सनातनी बैनर, हाथ में तख्तियां और आँखों में अटूट निष्ठा लिए मातृशक्ति का नेतृत्व देखते ही बन रहा था।
इस पूरे अभियान को आगरा सहित पूरे ब्रज क्षेत्र में गति दे रही हिमानी चतुर्वेदी की मेहनत और प्रबंधन की भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है। बिना किसी सरकारी सहायता या बाहरी चंदे के, उन्होंने अपने निजी संसाधनों और अदम्य इच्छाशक्ति से इस आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया। उनके एक आह्वान पर सैकड़ों महिलाएं और युवा अपनी आस्था की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर आए। हिमानी चतुर्वेदी ने साबित कर दिया कि जब उद्देश्य पवित्र हो और नेतृत्व निस्वार्थ, तो वह मौन क्रांति एक विराट जनादेश' का रूप ले लेती है। हिमानी चतुर्वेदी के नेतृत्व में आगरा ने आज दिल्ली और लखनऊ तक एक स्पष्ट संदेश भेज दिया है। यह भीड़ भाड़े की नहीं, बल्कि आस्था की थी। यह पसीना थकान का नहीं, बल्कि संकल्प का था। जब समाज अपनी 'माता' के सम्मान के लिए सड़क पर उतरता है, तो इतिहास की धारा बदल जाती है।
एसडीएम कार्यालय में गूँजी 'करतल ध्वनि
जब गौ-भक्त संकीर्तन करते हुए एसडीएम सदर सचिन राजपूत के कार्यालय पहुँचे, तो वहाँ का वातावरण आध्यात्मिक हो गया। कार्यालय के भीतर जब भक्तों ने करतल ध्वनि के साथ कीर्तन शुरू किया, तो स्वयं एसडीएम भी इस भावपूर्ण दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने पूरे आदर के साथ उन हस्ताक्षरित पत्रकों की पोटली स्वीकार की। इस अवसर पर मंत्र उच्चारण करते हुए पूरे विधि विधान और आस्था के साथ शिष्टाचार का पालन करते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया।
यात्रा में रथ पर सवार होकर चल रहे दो नन्हे गौ-वंश (बछड़े) मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। जहाँ से भी यह रथ गुजरा, लोग अपने सीस नवाते और उन्हें दुलार करते नजर आए। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि सनातन धर्म में गौ-सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कार है।
अभियान में शामिल रहे 'आस्था के स्तंभ-
इस ऐतिहासिक यात्रा में शहर के प्रख्यात संतजन, समाजसेवी, अधिवक्ता और प्रबुद्ध वर्ग ने कदम से कदम मिलाया। प्रमुख रूप से साध्वी श्यामा गोपाल सरस्वती, बाबा परमानंद जी और गरिमा किशोरी की आध्यात्मिक उपस्थिति ने भक्तों में ऊर्जा का संचार किया। साथ ही, अभियान को सफल बनाने में धर्मवीर तोमर, रविकांत सूर्यवंशी, आकाश, शुभम, अमरनाथ, अधिवक्ता आशुतोष, तेजेन्द्र तोमर, प्रियंका, सविता जैन, अदिति कल्याण, गुंजन पंडिता, गोपाल चौधरी, आनंद पंडित और अभिषेक जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों का सराहनीय योगदान रहा।