आगरालीक्स….. आगरा के ठाकुर मथुराधीश जी महाराज मंदिर में पाटोत्सव संग प्रारम्भ हुए पुरुषोत्तम मास के उत्सव
पाटोत्सव के साथ आज यमुना किनारा स्थित प्राचीन पुष्टीमार्गीय श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज के मंदिर पुरुषोत्तम मास के उत्सवों का शुभारम्भ हुआ। मंदिर में हर तरफ सतरंगी फूलों की महक और श्रीहरि के जयकारे गूंज रहे थे। अलौकिक छटा के साथ श्रंगारित ठाकुर जी के दर्शन को हर भक्त उत्साहित और ललायित था।
सोमबार को बागचा उत्सव का भक्ति भाव के साथ आयोजन किया जाएगा।यमुना सेवक बृज खंडेलवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के अधिष्ठाता, शुद्धाद्वैत वेदांत के प्रवर्तक तथा भक्ति मार्ग के महान आचार्य थे। तेलंग ब्राह्मण परिवार में काशी में जन्मे वल्लभाचार्य ने मात्र ११ वर्ष की आयु में वेद-वेदांत, पुराणों तथा भगवद्गीता पर पूर्ण अधिकार प्राप्त कर लिया था।
उन्होंने श्रीमद् भागवत पुराण पर अपनी प्रसिद्ध टीका ‘सुभोधिनी’ लिखी तथा ‘अनुबाष्य’ आदि ग्रंथों के माध्यम से शुद्धाद्वैत सिद्धांत प्रतिपादित किया, जिसमें ब्रह्म को सगुण, साकार और पूर्ण मानते हुए जीव को उसका अंश बताया गया है। पुष्टिमार्ग की स्थापना उन्होंने की, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की सेवा भक्ति मुख्य है तथा भक्त की उन्नति भगवान की कृपा (पुष्टि) पर निर्भर करती है। उन्होंने ‘अष्टछाप’ कवियों को प्रेरणा दी तथा गोस्वामी कुल की परंपरा प्रारंभ की। आज भी उत्तर भारत, राजस्थान, गुजरात तथा विश्व के विभिन्न भागों में उनके अनुयायी श्रीनाथजी, नवनीत प्रियजी आदि स्वरूपों की सेवा-पूजा पुष्टिमार्ग के अनुसार करते हैं।
महाप्रभु वल्लभाचार्य भक्ति, ज्ञान और कर्म के समन्वय के प्रतीक माने जाते हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से महंत नंदन श्रोत्रिय, डॉ हरेंद्र गुप्ता, जगन प्रसाद तेरीया, रोहित गुप्ता, सुरेंद्र सिंह, अपला शर्मा, सूर्या श्रोत्रिय, चतुर्भुज तिवारी, राहुल राज, दीपक राजपूत, निधि पाठक, पद्मिनी ताजमहल, मीरा खंडेलवाल, बल्लभ, अभिनव श्रोत्रिय, जुगल किशोर श्रोत्रिय आदि उपस्थित थीं।