आगरालीक्स…. आगरा कॉलेज के ललित कला के पूर्व विभागाध्यक्ष अश्वनी चचे अश्वनी शर्मा का निधन हो गया। जनकपुरी में जनकमहल को भव्यता देने के लिए अश्वनी चचे को याद रखा जाएगा। शाम चार बजे ताजगंज श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार, सोशल मीडिया पर अश्वनी चचे से जुड़े संस्मरण साझा किए जा रहे हैं, आप भी जानें हरदिल अजीज अश्वनी चचे को
अश्वनी चचे नहीं रहे
आगरा कालेज के ललित कला के पूर्व विभागाध्यक्ष अश्वनी शर्मा यानी अश्वनी चचे आज प्रातः नहीं रहे। जो उन्हें जानते हैं, वही समझ सकते हैं कि उनका जाना कितनी बड़ी क्षति है। यह सही है कि पिछले काफी समय से वे अस्वस्थ चल रहे थे, फिर भी उनसे जुड़ा कोई शख्स इस खबर को सुनना नहीं चाहता था। लेकिन यह तो सब जानते हैं कि जाना सबको है। चचे मास्टर आफ आल थे, आगरा में जनकपुरी में जनकमहल का निर्माण उनकी सलाह और अद्भुत निर्देशन के बिना हो पाना मुश्किल हो जाता था। मित्रों के यहां या मित्रों के रिश्तेदारों के यहां कोई भी विवाह या बड़ा आयोजन बिना चचे की सलाह के हो पाना संभव नहीं था। हर समस्या का तोड़ चचे के पास होता था और ऐसी फील्डिंग(इस शब्द का प्रयोग इन अर्थों में मैंने पहली बार उन्ही के मुंह से सुना था) सजाते थे कि सब अवाक रह जाते थे। किसी का घर बन रहा तो चचे आर्किटेक्ट से भी ज्यादा उपयोगी सलाह दे डालते थे। चचे का कान्फीडेंस लाजवाब था वो आपके कमीज की ऐसी डिजायन बनवा सकते थे कि पूरा शहर आपकी ही कमीज की चर्चा करे। सूरदसन में नाटक का मंचन होना हो तो चचे मंच सज्जा में सबको पीछे छोड़ देते थे, चरित्रों के पहनावे पर उनके सुझाव लाजवाब होते थे। वे अपने कुर्तों की खूबसूरती के लिए हमेशा सराहे जाते थे, इन कुर्तों को सिलने में चचे की जो डिजाइनिंग डिमांड होती थी उसपर दर्जी खोपड़ी खुजाने लगते थे। चचे का दिलचस्प व्यक्तित्व ऐसा था कि कोई बच्चा भी उनका दोस्त हो सकता था और बड़े-बड़े दिग्गज भी उनके आगे पानी मांग सकते थे या मांगते थे। चचे किसी परफेक्ट बालर को बालिंग करने का भी मशविरा दे सकते थे, चचे क्रिकेट मैदान की पिच भी तैयार कर सकते थे, तो किसी बड़े व्यापारी को व्यापार करना भी सिखा सकते थे। सजावट चाहे शामियाने की हो या घर की चचे से बेहतर सलाह कोई नहीं दे सकता था। आगरा और आगरा से बाहर उनके अनेक मित्र उन्हें अपना गुरु ही मानते हैं। दिल इतना बड़ा कि साथी मित्र जब ठिठोली करते करते सीमा पार कर जाते थे तो वह उसे भी बड़ी सहजता से स्वीकार कर लेते थे। सफेद चमकती हुई दाढ़ी में चचे पहली नजर में कोई बड़े गंभीर फिलास्फर से नजर आते थे लेकिन बात शुरू करते ही चचे बच्चे बन जाते थे। मेरी फेसबुक पर मुझसे जुड़े तमाम ऐसे लोग होंगे जो उन्हें नहीं जानते, लेकिन इसको पढ़ने के बाद मैं ऐसा मानता हूं कि उन्हें यह महसूस हो जाएगा कि आखिर ऐसी शख्सियत को कौन प्यार नहीं करेगा और ऐसी हस्ती का जाना किसको नहीं अखरेगा। आगरा के वे दुलारे थे और सम्मानित हस्ती थे। वैसे तो मुझे उनके स्वर्गारोहण का पूर्ण विश्वास है लेकिन फिर भी ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने चरणों में स्थान देना और उनके शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति। ओम शांति। किशन चतुर्वेदी जी की फेसबुक पोस्ट से

अश्वनी शर्मा जी के निधन का समाचार जानकर बहुत ही दुःख हुआ , शर्मा जी कला के प्रति समर्पित रहे , कला को ही अपने जीवन का साधक बनाया , आगरा ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों मैं अपनी कला का लोहा मनवाया , जनकपुरी अथवा अन्य आयोजनों मैं निखार के लिए आयोजक अश्वनी चाचा को ही याद करते थे , जनकपुरी मंच अथवा कोई भी आयोजन का मंच कलाकार उनके निर्देशन मैं तैयार करते थे , अश्वनी चाचा को कई सम्मानों से नवाजा गया , यह आगरा वासियों के लिए गौरव की बात है , मून ओलंपिक मैं भी अश्वनी चाचा बढ़कर हिस्सा लेते थे , इसके अलावा हम ललित कला मंच को भी शिखर पर पहुंचाने मैं अश्वनी चाचा का बहुत बड़ा योगदान रहा , नाट्य कला क्षेत्र मैं भी उनका बतौर कलाकार आगरा वासियों के लिए गर्व की बात है , आगरा वासियों के लिए अश्वनी चाचा का यूं अचानक चले जाना बहुत बड़ा नुकसान है, ऐसे मैं मैं उनको भावपूर्ण श्रदांजलि अर्पित करता हूं और प्रभु से कामना करता हूं कि वे उनके सुयोग्य पुत्र मून और उनके शोकाकुल परिजनों को इस वज्रपात से उबरने की शक्ति दें , साथ ही अश्वनी चाचा कॊ वे अपने श्रीचरणों मैं जगह दें , ओम शांति _ गजेंद्र यादव एवं परिवार फेसबुक से
,