आगरालीक्स…चलने में थे जो लाचार, आगरा के उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल ने उनकी जिंदगी कर दी रोशन. एक साल में 200 से अधिक क्रिटिकल सर्जरी को दिया सफल अंजाम…हड्डी जोड़ प्रत्यारोपण के लिए जयपुर और दिल्ली से आ रहे मरीज
प्रदीप बेड पर है। चलने फिरने में असमर्थ है। कूल्हा डैमेज है। किडनी भी फेल और सामने पहाड़ जैसी जिंदगी। सवाल अब वह क्या करे। उसने तमाम जगह दिखाया पर पैरों पर खड़ा नहीं हो सका। इसी तरह अर्जुन और मुकेश भी परेशान हैं। उनके घुटने घिस गए हैं। चलना तो दूर खड़ा होना मुश्किल है। इस तरह के दिल्ली और जयपुर जैसे शहरों के मरीज हड्डी और जोड़ प्रत्यारोपण के क्षेत्र में अग्रणी उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण किफायती और बेहतर ट्रीटमेंट मिलना है। यहां की तुलना में वहां इलाज काफी खर्चीला है। बीते एक साल में 200 से अधिक क्रिटिकल सर्जरी को अंजाम दिया गया। यह आंकड़ा मंडल में अन्य अस्पतालों की तुलना में काफी ज्यादा है।
वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ दुबे के नेतृत्व में ऐसी जटिल सर्जरियां की गईं, जिनमें मरीजों को नया जीवन मिला। खास बात यह है कि दर्जनों मरीज दिल्ली और जयपुर जैसे बड़े शहरों से यहां इलाज के लिए आए। इनमें कई हार्ट पेशेंट भी थे, जिनका हड्डी जोड़ प्रत्यारोपण करना बेहद जोखिम भरा था, लेकिन अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने हर चुनौती को अवसर में बदल शानदार नतीजे दिए।
हर जटिल केस बना सफलता की मिसाल
डॉ. सिद्धार्थ दुबे ने बताया कि यहां आने वाले अधिकतर मरीज गंभीर जॉइंट रिप्लेसमेंट और हड्डियों की जटिल समस्याओं से जूझ रहे थे। कुछ मरीजों की दोनों किडनी फेल थीं, फिर भी उनके कूल्हे प्रत्यारोपित कर उन्हें नया जीवन दिया गया। यह उपलब्धि छोटे शहरों के मामले में मिसाल है।
तकनीक और अनुभव का बेजोड़ संगम
उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल आधुनिक चिकित्सा तकनीकों से लैस है। यहां नवीनतम प्रत्यारोपण तकनीकों, मिनिमल इनवेसिव सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे मरीजों की रिकवरी तेज होती है।
मरीजों का भरोसा, अस्पताल की सफलता
अस्पताल की सबसे बड़ी सफलता मरीजों की संतुष्टि है। अब आगरा और आसपास के मरीज इलाज के लिए बड़े शहरों की बजाय यहीं भरोसेमंद उपचार पा रहे हैं। डॉ. सिद्धार्थ दुबे और उनकी टीम की मेहनत ने उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल को आगरा मंडल में हड्डी और जोड़ प्रत्यारोपण के लिए पहली पसंद बना दिया है।