आगरालीक्स…ताजनगरी में हिंदुस्तान ने गले लगाया लिथुआनियां. भारतीय- लिथुआनियन संगीत की बही अमृत धारा, सांस्कृतिक सेतु की इंद्रधनुषी छटा ने किया भाव-विभोर
भारत की सनातन परंपरा, राजपूताना गौरव और वैदिक संस्कृति को आज भी जीने वाले बाल्टिक देशों में से एक प्रमुख राष्ट्र लिथुआनियां के साथ स्नेह-संबंध जोड़ने की अनूठी सांस्कृतिक पहल ताज नगरी में रविवार को कला और साहित्य को समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती द्वारा की गई। सब के द्वारा सराही गई इस पहल के अंतर्गत संस्कार भारती आगरा पश्चिम शाखा के बैनर तले प्रायोजक संस्कार भारती आगरा महानगर ब्रज प्रांत और सह प्रायोजक डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम और इंटरनेशनल सेंटर फॉर कल्चरल स्टडीज के साथ संस्कार भारती की विभिन्न शाखाओं के सहयोग से बाग फरजाना स्थित संस्कृति भवन में रविवार को भारत-लिथुआनिया सांस्कृतिक संगीत समारोह आयोजित किया गया।

लिथुआनियां में झलकी भारतीय आत्मा
लिथुआनिया में भारतीय आत्मा की झलक मिली जब समारोह में छह सदस्यीय लिथुआनियन कल्चरल ग्रुप कुलग्रिंडा ने स्वातंत्र्यसमर के लिए तैयार किए गए लोकगीतों के साथ वंदे मातरम की सामूहिक प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। भारत के पवित्र स्थान देवी सती के स्थल कनखल से जुड़ा उनका विशेष वाद्य यंत्र कनखल सबके आकर्षण का केंद्र रहा और कानों में अध्यात्म का रस घोलता रहा।
भाव स्वर ताल संगम ने बांधा समां..
प्रो. नीलू शर्मा जी के निर्देशन में डॉ. शिवेंद्र प्रताप त्रिपाठी, राहुल निवेरिया, एसडी श्रीवास्तव, रुचि शर्मा और विदुर अग्निहोत्री ने तबला, वायलिन, सितार, कथक और गायन के मणिकांचन संयोग से भाव स्वर ताल संगम का ऐसा अद्भुत आयोजन किया कि आगरा में पहली बार की गई इस अद्भुत प्रस्तुति पर सब झूम उठे।

इन्होंने भी लगाए चार चांद
समारोह के मुख्य अतिथि व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बाँके लाल गौड़ और समाजसेवी-उद्यमी धन कुमार जैन ने मां भारती के समक्ष दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उनके साथ विशिष्ट अतिथि व संस्कार भारती के अखिल भारतीय संगीत प्रमुख अरुण कुमार शर्मा, प्रांतीय संरक्षक योगेश अग्रवाल, स्वागताध्यक्ष नीतेश अग्रवाल, इंटरनेशनल सेंटर फॉर कल्चरल स्टडीज के शोध अधिकारी रविशंकर, कार्यक्रम समन्वयक आलोक आर्य, सह समन्वयक एड. अमित जैन, कार्यक्रम संयोजक ओएस गर्ग और सह संयोजक राजीव सिंघल मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय वैदिक संस्कृति विश्व के कोने कोने में है। जरूरत है उसे खोजने और उससे अपनेपन का सेतु बनाने की। इस दिशा में यह कार्यक्रम मील का पत्थर है। भारतीय संगीतालय के कलाकारों ने ध्येय गीत, अरुण कुमार शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा और डॉ. केशव शर्मा शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। स्वागताध्यक्ष नीतेश अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। डॉ. अंशू अग्रवाल ने संचालन किया।
तुम हो अपने ही भाई..
कार्यक्रम संयोजक ओम स्वरूप गर्ग ने लिथुआनियां सांस्कृतिक दल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “दूर देश से आए हो पर, तुम हो अपने ही भाई। चेहरे पर वेदों की आभा, तुम भारत की परछाई.. आपसे हमारा सनातन नाता है। आपके भीतर हमें भारत नजर आता है।” समारोह में एडवोकेट सुभाष चंद्र अग्रवाल, हरिमोहन सिंह कोठिया, डॉ. मनोज पचौरी, आशीष अग्रवाल, नितिन गुप्ता, इंजी. नीरज अग्रवाल, यतेंद्र सोलंकी, डॉ. पंकज भाटिया, हरेश अग्रवाल, वनवासी कल्याण आश्रम के संजय जी, आरएसएस के केशव शर्मा, अशोक कुलश्रेष्ठ, शिवेंद्र जी, लड्डू जी, अभिषेक गर्ग, शशांक तिवारी, श्याम तिवारी, संदीप गोयल, मुरारी लाल वर्मा, एड. राहुल शर्मा और नितिन अरोरा भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। रामकुमार अग्रवाल, प्रेमचंद अग्रवाल सुपारी वाले, सुशील कपूर, प्रदीप सिंघल, संदीप अग्रवाल, दीपक गोयल, विनोद गुप्ता, रामअवतार यादव, प्रखर अवस्थी, राजेंद्र गोयल, राहुल शर्मा, अनीता भार्गव, नीता गर्ग और मीना अग्रवाल की भी उपस्थिति रही।