आगरालीक्स…. आगरा में अनचाहे शिशु को डस्टबिन, तालाब में फेंकने के बजाया एसएन में बनाए जा रहे पालना आश्रय स्थल में छोड़ सकेंगे। छोड़ने पर कार्रवाई नहीं होगी, बच्चे को दिया जाएगा गोद।
आगरा में स्त्री रोग विभाग की बिल्डिंग एमसीएच के बगल में पालना आश्रय स्थल बनाया जाएगा, इसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है। आश्रय पालना स्थल की स्थापना के लिए आज महिला चिकित्सालय में स्थान चयन हेतु “जीवन संरक्षण अभियान” के संस्थापक संचालक देवेंद्र जे अग्रवाल “गुरुजी” द्वारा सरोजनी नायडू चिकित्सा महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता एवम् वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निरीक्षण कर महिला चिकित्सालय के बाहर की ओर स्थान चयन किया गया। गुरुजी ने बताया कि कॉलेज प्रशासन द्वारा भूमि आवंटन पत्र प्राप्त हो गया है लगभग 2 माह में आश्रय पालना स्थल स्थापित कर समाज और प्रशासन को समर्पित कर दिया जावेगा। यह पहल हर अनचाहे नवजात शिशु को जीने का अधिकार प्राप्त हो सकेगा। साथ ही इच्छुक दंपति इन मासूम को विधि अनुरूप गोद ले कर अपना परिवार पूरा कर सकेंगे।

शिशु को छोड़ने वाले की सुरक्षा एवम् गोपनीयता
- आश्रय पालना स्थल हाईटेक मोशन सेंसर से युक्त होंगे जिससे की पालना स्थल में शिशु को छोड़ने के 2 मिनिट पश्चात चिकित्सालय के स्वागत कक्ष में अपने आप घंटी बजेगी। इस दो मिनट के समय में छोड़ने वाला व्यक्ति आसानी से सुरक्षित रूप से वहां से जा सकेगा और इससे उसकी पहचान भी गोपनीय बनी रहेगी।
- जो भी व्यक्ति आश्रय पालना स्थल के पालना में नवजात शिशु का सुरक्षित छोड़ता है उसकी पहचान पूर्ण रूप से गुप्त रखी जाएगी। ना ही उसे रोका जाएगा, ना ही टोका जाएगा, ना ही कुछ पूछा जाएगा, ना ही उन्हें पकड़ा जाएगा, ना ही उसके विरुद्ध पुलिस में कोई एफ.आई.आर दर्ज की जा सकेगी।
मासूम की सुरक्षा
- स्वागत कक्ष में घंटी बजते ही चिकित्साकर्मी द्वारा आश्रय पालना स्थल से शिशु को तत्काल प्राप्त कर उसकी चिकित्सकीय एवं व्यक्तिक देखभाल यथा उसको दूध पिलाना, साफ सफाई करना, स्वच्छ कपड़े पहनाना आदि की जावेगी।
- शिशु के स्वस्थ होने पर उसे तत्काल नजदीकी राजकीय मान्यता प्राप्त शिशु गृह में भेज दिया जाएगा।
- जिला बाल कल्याण समिति द्वारा शिशु को आवश्यकतानुसार दत्तक ग्रहण हेतु विधिक रुप से स्वतंत्र घोषित किया जाएगा।
- केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा शिशु के दत्तक ग्रहण की कार्यवाही की जावेगी।
- तत्पश्चात माननीय जिला न्यायालय द्वारा उस शिशु को दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुनर्वास कर दिया जाएगा, जहां से मिलेगा उसे एक नया जीवन, नया नाम, नई पहचान।
आश्रय पालना स्थलों की स्थापना महेशाश्रम, मां भगवती विकास संस्थान, उदयपुर द्वारा अपने “जीवन संरक्षण अभियान” के तहत की जा रही है। इस अभियान से अब तक सैकड़ों – सैकड़ों मासूम बच्चों का जीवन बचाया एवम् बनाया जाना संभव हो सका हैं।