आगरालीक्स…टूटे गमले और सूखे पेड़, सड़कों पर शहर की सुंदरता और पर्यावरण के प्रति लापरवाही का यह दुखद दृश्य है, सीधा सवाल है : सूखते पौधों में पानी देना, टूटे गमलों को ठीक कराना या हटाना किसकी जिम्मेदारी ?
शहर की सड़कों पर इन टूटे गमलों और सूखे पेड़—पौधों को देखकर शायद आपका दिल टूट जाए, लेकिन जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं पड़ता। यकीनन यह बेहद दुखद दृश्य है जो दिखाता है कि शहर में पेड़-पौधों के रखरखाव और संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लाखों—करोड़ों रूपये खर्च कर आगरा में यमुना किनारा, हाईवे, एमजी रोड सहित सड़कों के किनारे जिन पौधों को नगर निगम ने बड़े—बड़े गमलों और ट्री गार्ड में लगाया था वह अब रामभरोसे हैं। बताया जा रहा है कि शुरूआत में एजेंसी को इनमें खाद—पानी की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन फिलहाल कई जगह यह सूख रहे हैं। हाईवे के डिवाइडरों और सड़कों के फुटपाथ पर रखे गए गमले टूट गए, जबकि पानी और खाद न मिलने पर पौधे नष्ट हो चुके हैं।जिस तरह हरे—भरे और संरक्ष्ति पेड़—पौधे शहर की आबोहवा को स्वच्छ और आकर्षक बनाते हैं ठीक उसके विपरीत यह सूखे पेड़ और टूटे गमले शहर के पर्यावरण को नुकसान भी पहुंचाते हैं, क्योंकि वे हवा को शुद्ध न हीं करते हैं और प्रदूषण को बढ़ाते हैं। इनका एक नुकसान शहर की सुंदरता को कम और अव्यवस्थित करने के रूप में भी सामने आता है। इसके अलावा
यह दृश्य शहर के निवासियों और देशी—विदेशी मेहमानों को एक नकारात्मक संदेश भेजता है, जो दर्शाता है कि शहर की देखरेख करने वाले लोग शहर की सुंदरता और पर्यावरण के प्रति उदासीन हैं।