आगरालीक्स …आगरा में बंदरों की समस्या बड़ा मुद्दा, छवि हो रही धूमिल,। बंदर रेस्क्यू सेंटर और बंदरों की नसबंदी के लिए नगर निगम और वन विभाग को आदेश दिए गए हैं। बंदरों को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लम्बित जनहित रिट याचिका में न्यायालय के संज्ञान में लाया जायेगा ताकि 17 अगस्त 2022 को को होने वाली सुनवाई में पर्यटन और पर्यटकों को होेने वाले नुकसान की ओर भी न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया जा सके। ताजमहल में बंदरों के द्वारा किये जाने वाले आतंक से आगरा शहर की छवि धूमिल हो रही है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जिला पर्यावरण समिति के सदस्य केसी जैन ने पर्यावरण समिति की बैठक दिनांक 25 जुलाई 2022 में बंदरों की समस्या का मुद्दा उठाया था। कहा था कि बंदरों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिससे आये दिन समस्यायें हो रही हैं और इसका निदान कराया जाये व बंदर रेस्क्यू सेन्टर की स्थापना करायी जाये। डीएम प्रभु नारायन सिंह ने आदर्श कुमार प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, आगरा को निदेश दिये कि वह नगर आयुक्त, नगर निगम आगरा के साथ मिलकर बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान करायें।
बन्दरों की नसबन्दी भी आवश्यक है लेकिन यदि नसबन्दी के बाद बन्दरों को शहर में ही छोड़ दिया जायेगा तो समस्या ज्यों कि त्यों बनी रहेगी। नगर निगम द्वारा जो योजना एसओएस वाइल्ड लाईफ के द्वारा बनवायी गयी है उसमें बंदरों रेस्क्यू सेन्टर की बात नहीं है केवल बंदरों की नसबंदी की बात है।
प्रशांत जैन द्वारा भी बताया गया कि ताजमहल पर हुयी अभी हाल की घटना जिसमें बंदरों ने दो पर्यटकों को चोटिल कर दिया को भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लम्बित जनहित रिट याचिका में न्यायालय के संज्ञान में लाया जायेगा।