आगरालीक्स…आगरा की जनकपुरी में राजा दशरथ के बाद दानदाताओं में भी रोष. बोले—मंच पर चल रहा एकाधिकार. जन—जन से जुड़े जनकपुरी महोत्सव में मच रही रार
आगरा के कमला नगर में सजी जनकपुरी में रार थमने का नाम नहीं ले रही है. बड़हार की दावत का निमंत्रण न मिलने से नाराज हुए राजा दशरथ बने अजय अग्रवाल ने इसको लेकर रोष जताया और जनकमहल मंच पर उचित स्थान न दिए जाने पर भी अपनी पीड़ा बताई. वहीं दानदाताओं में भी रोष छाया हुआ है. उनका कहना है कि जनकमंच पर एकाधिकार दिखाई दे रहा है और सम्मानित पदाधिकारियों और अन्य दान दाताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है.
आरोप है कि मंच पर केवल दो लोगों ने ही माइक थामे हुआ है और उन्हीं की अनुमति से ही कोई मंच पर जा पा रहा है. उनके करीबी ही मंच पर चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे थे जिसके कारण दानदाताओं और अन्य समाजसेवियों में नाराजगी छाई हुई है. उनका कहना है कि यह आयोजन जन—जन से जुड़ा हुआ है. जब सनातनी की परंपरा का उल्लंघन होता है अथवा प्रहार किया जाता है तो कमेटी की गरिमा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
जनकपुरी के मंच से शुरू हुआ विवाद
18 सितंबर को कमला नगर में सजी जनकपुरी के जनक मंच पर राजा दशरथ को खंभे के पीछे बैठाने से जहां असहज स्थिति उत्पन्न हुई, वहीं शुक्रवार को आयोजित बड़हार की दावत में उन्हें व्यक्तिगत आमंत्रण पत्र न दिए जाने से मामला और तूल पकड़ गया। जनकपुरी महोत्सव समिति की ओर से राजा जनक राजेश अग्रवाल द्वारा रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों और नगरवासियों को बड़हार की दावत के लिए निमंत्रण दिया गया था। लेकिन राजा दशरथ अजय अग्रवाल को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण पत्र नहीं दिया गया। राजा दशरथ अजय अग्रवाल का कहना है कि शुक्रवार दोपहर लगभग 3:23 बजे राजा जनक का फोन आया और दावत में आने के लिए कहा गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें कोई निमंत्रण पत्र प्राप्त नहीं हुआ। राजा जनक का कहना था कि आमंत्रण लग्न पत्रिका के समय दे दिया गया था। राजा दशरथ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि बिना औपचारिक आमंत्रण और पूर्व सूचना के वे बड़हार की दावत में सम्मिलित नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुवार को जनक मंच पर उन्हें अमर्यादित व्यवहार का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी भावनाएँ आहत हुईं। अजय अग्रवाल ने कहा कि बिना औपचारिक आमंत्रण और पूर्व सूचना के वे बड़हार की दावत में सम्मिलित नहीं हो सकते.