आगरालीक्स…संस्कृत जीवन का आधार है, संस्कृत जीवन का सार है. इस आशय के साथ डॉ. भीमराम आम्बेडकर विवि में संपन्न हुआ 15 दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर
डॉ.भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा 15 दिवसीय संस्कृत- संभाषण शिविर का आयोजन 20 जून 2023 से 5 जुलाई 2023 तक किया गया. इस शिविर का समापन समारोह 5 जुलाई को कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ के सूर कक्ष में हुआ जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने की. मुख्य अतिथि आरबीएस कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर विजय श्रीवास्तव एवं विशिष्ट वक्ता दयालबाग शिक्षण संस्थान की डॉ. निशीथ गौड़ रहीं. इस समारोह में मुख्य अतिथि प्रोफेसर विजय श्रीवास्तव ने कहा कि संस्कृत हमारे जीवन का आधार है, संस्कृत जीवन का सार है. उन्होंने अधुनातन संदर्भ में संस्कृत की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला और देव भाषा को ब्रह्मांड से संपर्क स्थापित करने की भाषा कहा.
प्रो. श्रीवास्तव ने इस अमृत भाषा को विभिन्न रोजगारों को प्राप्त करने की भाषा भी कहा है. आईएएस में टीजीटी, पीजीटी की परीक्षाओं में तथा सेना में भी संस्कृत की उपयोगिता के संदर्भ में होने प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि ज्योतिष में तथा कथा वाचन जैसे क्षेत्रों में संस्कृत को जानने वाले अपनी पहचान बना सकते हैं. अवसाद से मुक्त होने के लिए संस्कृत के महत्व की ओर प्रो.श्रीवास्तव ने ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि हमें सामान्य बोलचाल या जीवन में संस्कृत को व्यवहार में लाना चाहिए. कार्यक्रम की विशिष्ट वक्ता दयालबाग शिक्षण संस्थान से आईं डॉ.निशीथ गौड़ ने विभिन्न ग्रंथों के उद्धरण से यह बात सिद्ध की कि संस्कृति को समझने के लिए संस्कृत को समझना होगा और संस्कृत के मान सम्मान के बिना हम संस्कृति को नहीं समझ सकते. उनका यह भी कहना था कि संस्कृत में निहित ज्ञान को हमें अपने आचरण में ढालना चाहिए.

इस संभाषण शिविर में जहाँ एक ओर 82 वर्ष के लक्ष्मी नारायण थे तो दूसरी ओर 7 वर्ष की अनन्या ने भी भाग लिया और संस्कृत संभाषण शिविर में संस्कृत का ज्ञानार्जन किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.आशु रानी ने अपने विचार व्यक्त किए और उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के माध्यम से मेरा साक्षात्कार संस्कृत के साथ हुआ और यह सत्य बात है कि यह देव भाषा हमें देवताओं के संपर्क में ले जाती है. मानसिक शांति के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान बहुत आवश्यक है. प्रो. आशु रानी ने कहा कि वर्तमान में वैज्ञानिक और डॉक्टर भी संस्कृत का ज्ञानार्जन कर रहे हैं जिससे कि वह अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकें और अपने ज्ञान के प्रसार से जन-जन को लाभ पहुंचा सकें. उन्होंने विद्यापीठ के संस्कृत विभाग को यह निर्देश दिया कि वह अनुवादक,ज्योतिष पर आधारित तथा उसके अलावा विभिन्न विषयों से जुड़े हुए विद्यार्थियों के लिए संस्कृत संभाषण शिविर का आयोजन करें जिससे कि यह मूल्य संवर्धित पाठ्यक्रम या मूल्य संवर्धित आयोजन विश्वविद्यालय की कीर्ति में अभिवृद्धि कर सकेंगे.
संस्थान के निदेशक प्रो.प्रदीप श्रीधर ने आमंत्रित अतिथियों का परिचय कराया. अतिथियों के स्वागत के बाद प्रतिभागियों ने संस्कृत में अपनी प्रस्तुतियां दी. स्वागत-गीत, प्रज्ञविवर्धन स्त्रोत, रुद्राष्टकम् का पाठ किया गया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. वर्षा रानी ने एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. केशव शर्मा ने किया. इस कार्यक्रम में डॉ. अमित सिंह, डॉ.प्रदीप वर्मा, डॉ. आदित्य प्रकाश, अनुज गर्ग, अनिल मित्तल, केके गोयल, राधेश्याम गुप्ता, लव-कुश, भानु प्रताप, नीरज, विशाल, मनोज कुमार, सूरज आदि विद्यार्थी उपस्थित रहे.