आगरालीक्स…गोवर्धन बड़ी परिक्रमा मार्ग पर लगे दिव्य छप्पन भोग. स्वर्ण हंस रथ पर विराजे गिरिराज महाराज. आगरा के भक्तों ने की महाप्रसादी…
नीला विस्तृत आकाश, घनघनाते मेघों की गर्जना, विद्युत की चमक, पूर्णिमा का आलोक बिखेरता चंद्रमा, गिरते झरनों की कल-कल ध्वनि और हरित श्रृंगार से सजी प्रकृति—इन सभी के मध्य जब स्वर्ण हंस रथ पर विराजमान, हीरे-जवाहरात जड़ित आभूषणों और दिव्य श्रृंगार से अलंकृत श्री गिरिराज महाराज श्रद्धालुओं के समक्ष प्रकट हुए, तो गोवर्धन धाम में उपस्थित हर नेत्र श्रद्धा से नम हो गया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं वैकुंठ लोक धरती पर अवतरित हो गया हो। श्री गिरिराज जी सेवा मंडल, आगरा द्वारा श्री गुरु काष्र्णि आश्रम, बड़ी परिक्रमा मार्ग, आन्योर, गोवर्धन में आयोजित श्री गिरिराज जी छप्पन भोग महोत्सव के द्वितीय दिवस भक्ति, सौंदर्य और दिव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला। विशेष रूप से सजी बैकुंठ लोक स्वरूप सज्जा ने श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभूति से भर दिया। चलते हुए बादल, गर्जन करती बिजली, प्रकाश और ध्वनि के विशेष प्रभावों के साथ सजी इस झांकी ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।
स्वर्ण हंस रथ पर विराजित गिरिराज महाराज का श्रृंगार अत्यंत मनोहारी रहा। हीरे-जवाहरात जड़ित मुकुट, अलंकृत वस्त्र, पुष्पमालाएं और दिव्य आभूषण प्रभु की शोभा को और भी अनुपम बना रहे थे। झरनों के प्रतीकात्मक प्रवाह और हरित सज्जा के बीच प्रभु के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को गौलोक की अनुभूति में डूबा हुआ महसूस करने लगे। “जय गिरिराज महाराज” और “गोविंद गोपाल की जय” के उद्घोषों से धाम गूंज उठा। बैकुंठ लोक स्वरूप दर्शन के उपरांत प्रभु को श्रद्धा पूर्वक छप्पन भोग रजत पात्रों में अर्पित किए गए। भोग अर्पण के पश्चात विधि-विधान से महाआरती अरविंद जी महाराज, हरिओम महाराज और संरक्षक महंत कपिल नागर के सानिध्य में संपन्न हुई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ सहभागिता कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्री गिरिराज जी का पूजन संस्थापक नितेश अग्रवाल, सह संस्थापक मयंक अग्रवाल, संरक्षक रविन्द्र गोयल, अध्यक्ष अजय सिंघल, महामंत्री विजय अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विशाल बंसल ने किया। इससे पूर्व 501 साधुओं की सेवा की गई जिसमें भोजन के साथ दैनिक जरूरत का सामान प्रदान किया गया।
द्वितीय दिवस का एक और प्रमुख आकर्षण रही महा प्रसादी सेवा, जिसमें हजारों भक्तों ने पंक्तिबद्ध होकर प्रेम और समर्पण भाव से प्रभु प्रसाद ग्रहण किया। सेवा कार्य में सदस्यों की निष्ठा और समर्पण देखने योग्य रहा। श्रद्धालुओं ने महा प्रसादी को गिरिराज महाराज की प्रत्यक्ष कृपा मानकर श्रद्धा से स्वीकार किया। इस अवसर पर संस्थापक नितेश अग्रवाल ने कहा कि बैकुंठ लोक स्वरूप के माध्यम से भक्तों को प्रभु के दिव्य धाम की अनुभूति कराना ही इस महोत्सव का उद्देश्य है। ठाकुर जी को 50 फुट ऊंचा और 30 फुट चौड़ा मंच पर स्वर्ण हंस रथ पर विराजित किया गया था।
सह-संस्थापक मयंक अग्रवाल ने कहा कि यह आयोजन भक्ति के साथ-साथ सेवा और समर्पण का महापर्व है। संरक्षक महंत कपिल नागर और रविंद्र गोयल ने कहा कि गिरिराज महाराज की सेवा स्वयं साधना है, जो भक्त को प्रभु के समीप ले जाती है। अध्यक्ष अजय सिंघल ने कहा कि द्वितीय दिवस की बैकुंठ लोक सज्जा ने पूरे महोत्सव को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। बैकुंठ लोक स्वरूप दर्शन, साधु सेवा, छप्पन भोग अर्पण और महा प्रसादी सेवा के बाद भजन संध्या हुई। ठाकुर जी को चांदी के पात्र में अमृतुल्य दुग्ध अर्पित किया गया और इसके बाद शयन आरती संग महोत्सव का समापन हुआ।