आगरालीक्स …आगरा की डॉ. नीतिका पारीक ने रीढ़ की हड्डी की गठिया यानी एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस पर शोध किया है। इस बीमारी में होम्योपैथी कारगर साबित हो रही है।
पारिक होम्योपैथिक सेंटर की निदेशिका डॉ. नीतिका पारीक ने एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस पर शोध पत्र प्रस्तुत किया है। क्योंकि जटिल स्पांडिलाइटिस के मरीजों को दशकों तक दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। जो उनके गुर्दे के लिए हानिकारक साबित होती हैं और नवीन एंटी टीएनएफ थेरेपी लाभदायक तो हैं किंतु शरीर में दबी टीबी को फैला सकती है। ऐसे में डॉ. नीतिका पारीक ने ब्रिटेन के बाथ में स्थापित यूनिवर्सिटी की इंडेक्स को मापदंड मानते हुए मरीजों पर होम्योपैथी के असर का विश्लेषण किया गया और प्रभावी पाया गया। डॉ. नीतिका ने बताया की यदि शुरुआती स्तर से होम्योपैथी का उपयोग हो तो इस रोग में होने वाली विकलांगता से मरीज को बचाया जा सकता है और दर्द निवारक दवाओं की आवश्यकता को खत्म किया जा सकता है। शोध पत्र का प्रकाशन इटली में किया गया है, इस शोध पत्र को हाल ही में डीईआई के राष्ट्रीय सेमिनार में डॉ. नितिका द्वारा प्रस्तुत किया गया, इसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
कमर के दर्द से होती है शुरूआत
एंकिलोसिंग स्पांडिलाइटिस के शुरुआती लक्षणों में कमर का दर्द, हर समय थकान महसूस होना और सुबह उठने पर पूरे शरीर और खास कर कमर में जकड़न होना मुख्य हैं। मरीज को अक्सर सुबह उठ कर अपनी दिनचर्या प्रारंभ करने में काफ़ी समय लगता है। यह रोग आगे चल कर रीढ़ की हड्डियों को आपस में जोड़ता है और विकलांगता भी ला सकता है। पात्र का प्रकाशन इटली में हुआ और इसे हाल ही में DEI यूनिवर्सिटा के राष्ट्रीय सेमिनार में डॉ नितिका द्वारा कीनोट वक्ता के रूप में प्रस्तुत किया गया । इस प्रस्तुति के लिए उन्हें सम्मानित किया गया और वैज्ञानिक जगत ने मील के पत्थर के रूप में सराहा।