आगरालीक्स…आगरा नगर निगम के चुनाव के लिए राजनीतिक दल तैयारियों में लगे हैं लेकिन निर्दलीयों का खासा रसूख। पार्टियों को भी देते हैं टेंशन।

पार्षदी के दावेदारों के सामने अभी कई चुनौतियां
आगरा नगर निगम के 100 वार्डों के लिए आरक्षण घोषित होने के बाद इसके खिलाफ लगातार आपत्तियां भी दर्ज कराई जा रही हैं। आरक्षण में 87 सीटों में बदलाव हुआ है। ऐसे हालात में पार्षदों का चुनाव लड़ने वाले दावेदारों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
आगरा की नगर निगम की राजनीति में राजनीतिक दलों के पार्षदों के अलावा निर्दलियों का अपने वार्डों के साथ नगर निगम सदन में खासा रसूख रहा है। बात अगर पिछले नगर निगम चुनाव की करें तो भाजपा और बसपा के बाद सबसे ज्यादा निर्दलीय विधायक जीते थे।
नगर निगम में भाजपा के 73 पार्षद
नगर निगम में वर्तमान में 73 पार्षद हैं, जिनमें से 53 जीतकर आए थे।10 पार्षद भाजपा में शामिल हो गए थे, 10 नामित किए थे।
बसपा 27 पार्षदों के साथ दूसरे नंबर पर
बसपा के 27 पार्षद चुनाव जीतकर आए थे और बाद में दो पार्षद बसपा में शामिल हो गए लेकन बाद में फिर दो ने बसपा छोड़ दी तो 27 पार्षद ही रही।
सपा सात तो कांग्रेस दो पार्षदों तक सिमटी
सपा के सात पार्षद हैं, जिनमें पांच जीतकर आए थे, तीन सपा में शामिल होने से संख्या आठ हो गई लेकिन एक ने सपा का साथ छोड़ दिया। कांग्रेस के दो पार्षद जीते और वह उससे जुडे रहे।
निर्दलीय जीते 15 फिर पकड़ा दूसरे दलों का दामन
निर्दलियों की बात की जाए तो पिछले चुनाव में 15 लोग निर्दलीय जीतकर आए थे, जिनमें कुछ पार्टियों के असंतुष्ट थे और उनका अपने वार्डों में खासा प्रभाव था। भाजपा और बसपा के बाद सबसे ज्यादा संख्या निर्दलियों की रहने पर बाद में इन पार्षदों को भाजपा, सपा और बसपा ने अपने दलों में शामिल कर लिया था।