आगरालीक्स…अपने बच्चों को डिग्री के साथ संस्कारों की भी दें ज्ञान….आगरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में जया किशोरी ने कहा— बच्चों को मार्डन बनाइये, वैस्टर्न नहीं
अपने बच्चों को मार्डन बनाइये, वैस्टर्न नहीं। किताबी डिग्री के साथ संस्कारों का भी ज्ञान दें। मार्डन होने का अर्थ समय के साथ चलना है। जिसका ज्ञान नारायण ने अपने 24 अवतारों के माद्यम से भी दिया। समय के साथ बदल-बदल कर भगवान ने 24 अवतारों के माध्यम से मनुष्य को ज्ञान दिया। त्रेता में श्रीराम ने कहा कोई कैसा भी हो मैं अपनी अच्छाई नहीं छोड़ूंगा। द्वापर में श्रीकृष्ण ने कहा तुम कैसे भी हो मैं सब ठीक कर दूंगा। समय के साथ बदलना अच्छा है, परन्तु अपनी संस्कृति और संस्कारों का त्याग नहीं करना चाहिए। अभिभावकों को सलाह दी कि शादी ब्याह से पहले बच्चों को काबिल बनाइये। विशेषकर बेटियों को। काबिल का सिर्फ डिग्री वाला ज्ञान नहीं, संस्कृति और संस्कारों को ज्ञान भी दें। ऐसी शिक्षा किसी काम की नहीं जहां संस्कार न हों। आज 4 लोगों को परिवार भी शिक्षतों से नहीं सम्भल रहा, जबकि पहले एक व्यक्ति पूरे कुटुम्ब का पालन पोषण प्रेम भाव से कर ले जाता था।फतेहाबाद रोड स्थित रोजदेवम में श्रीमद्भागवत कथा में आज व्यासपीठ पर विराजमान पूज्यश्री जया किशोरी ने भक्त ध्रुव व प्रह्लाद की कथा वर्णन करते हुए कहा कि ज्ञान का अर्थ संसार से विमुक्त होना नहीं बल्कि संस्कार के सत्य को समझना है। आज लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर जीवन में उलझे हैं। जीवन का सत्य जान लिया तो जीवन आसान हो जाएगा। सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारतवर्ष में जीवन का सत्य को मिटाने कई आक्रमणकारी आए। जिन्होंने हमारी संस्कृति और भक्ति को नष्ट करने का प्रयास किया। कहा जीवन के कुछ फैसले ईश्वर पर छोड़ना ही अच्छा है। आरती के साथ कथा विश्राम हुआ।
धन नहीं तो मन और तन से करें श्रीहरि की सेवा करें
आगरा। पूज्य श्रीजया किशोरी ने मन और तन की सेवा का वर्णन करते हुए कहा कि किसी स्वार्थ की भावना से सेवा न करें। बिना किसी अपेक्षा के सेवा करो। आपके मन की दया भगवान को आपकी ओर आकर्षित करती है। दुनिया तो ऐसी है, जो भगवान को भी गलत ठहराती है। आप खुद को अच्छा बनाए रखिए। भगवान हर बिगड़े काम को बनाता है। परन्तु हम स्वार्थी हैं। अच्छा हुआ तो अपना और खराब हुआ तो भगवान ने किया। स्वर्ग और नरक का वर्णन करते हुए कहा कि जैसे कपड़े वैसी सफाई, जैसे पाप वैसे दंढ मिलता हैं। भक्त ध्रुप की कथा के माद्यम से बताया कि भगवान जीवन की कठिनता को दूर नहीं करते परन्तु उसे सहने की शक्ति और सहायता अवश्य देते हैं। इस अवसर पर नरसिंह भगवान और भक्त प्रह्लाद की झांकी के दर्शन कर हर ओर नारायण के जयघोष गूंज उठे।
आगरा। श्रीराधे गोविन्दा मन भजले हरि का प्यारा नाम है… कीर्तन के साथ प्रारम्भ हुई श्रीमद्भागवत कथा में पूज्य श्रीजया किरोसी ने भक्तिमय भजनों के स्वर बिखेरे तो मानों कता पण्डाल वृन्दावन और बरसाना धाम बन गया। मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा…, किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए…, मैं तो आई वृन्दावन धाम, किशोरी तेरे चरणन मैं…, बांके टाकुर की ठकुरानी, वृन्दावन जिसकी रजधानी…, मारने वाला है भगवान बचाने वाला है भगवान…, श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि… जैसे भजन पर हर भक्त स्वर से स्वर मिलाकर और भक्ति में झूमता नजर आया।
धन नहीं तो मन और तन से करें श्रीहरि की सेवा करें
आगरा। पूज्य श्रीजया किशोरी ने मन और तन की सेवा का वर्णन करते हुए कहा कि किसी स्वार्थ की भावना से सेवा न करें। बिना किसी अपेक्षा के सेवा करो। आपके मन की दया भगवान को आपकी ओर आकर्षित करती है। दुनिया तो ऐसी है, जो भगवान को भी गलत ठहराती है। आप खुद को अच्छा बनाए रखिए। भगवान हर बिगड़े काम को बनाता है। परन्तु हम स्वार्थी हैं। अच्छा हुआ तो अपना और खराब हुआ तो भगवान ने किया। स्वर्ग और नरक का वर्णन करते हुए कहा कि जैसे कपड़े वैसी सफाई, जैसे पाप वैसे दंढ मिलता हैं। भक्त ध्रुप की कथा के माद्यम से बताया कि भगवान जीवन की कठिनता को दूर नहीं करते परन्तु उसे सहने की शक्ति और सहायता अवश्य देते हैं। इस अवसर पर नरसिंह भगवान और भक्त प्रह्लाद की झांकी के दर्शन कर हर ओर नारायण के जयघोष गूंज उठे।
बांके ठाकुर की ठकुरानी, वृन्दावन जिसकी रजधानी…
आगरा। श्रीराधे गोविन्दा मन भजले हरि का प्यारा नाम है… कीर्तन के साथ प्रारम्भ हुई श्रीमद्भागवत कथा में पूज्य श्रीजया किरोसी ने भक्तिमय भजनों के स्वर बिखेरे तो मानों कता पण्डाल वृन्दावन और बरसाना धाम बन गया। मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा…, किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए…, मैं तो आई वृन्दावन धाम, किशोरी तेरे चरणन मैं…, बांके टाकुर की ठकुरानी, वृन्दावन जिसकी रजधानी…, मारने वाला है भगवान बचाने वाला है भगवान…, श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि… जैसे भजन पर हर भक्त स्वर से स्वर मिलाकर और भक्ति में झूमता नजर आया।