आगरालीक्स ….आगरा में धुआं से जान बचाने के लिए बाथरूम में जाकर शावर चला दिया। दर्दनाक हादसे में चिकित्सक की मौत हो गई, बेटी खुशी की सूझबूझ से चार की जान बच गई। जानें धुआं से जान बचाने के लिए क्या करें।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आगरा के बालूगंज स्थित योग एवं प्राक्रतिक चिकित्सालय के संचालक डॉ. आशीष मित्तल के घर में शनिवार रात तीन बजे इनवर्टर में शार्ट सर्किट से आग लगने के बाद धुआं भर गया। भूतल पर उनके पिता गया प्रसाद अपने कमरे में सो रहे थे, प्रथम तल पर डॉ. आशीष दीक्षित उनके बेटे प्रणय, पत्नी प्राची और बेटी खुशी सो रहीं थी। कमरों में एसी चल रहा था। इससे आग लगने और घर में धुआं भरने का पता नहीं चला। प्राची और खुशी की आंख खुली, आग लगने से बिजली चली गई, इससे उन्हें नीचे जाने के लिए सीढ़िया दिखाई नहीं दी।

बाथरूम में घुसकर शावर चला दिया
डॉ. आशीष दीक्षित योग एवं प्राक्रतिक चिकित्सालय चलाते थे, वे जानते होंगे कि धुआं से कार्बन डाई आक्साइड सहित अन्य जहरीली गैंसों का स्तर बढ़ जाता है, सांस के माध्यम से फेंफड़ों तक पहुंचने से जान जा सकती है, इससे बचने के लिए पानी में कपड़ा भिगोकर मुंह पर रख लेना चाहिए। इसलिए प्राची, खुशी, इसके बाद डॉ. आशीष और प्रणय बाथरूम में चले गए, बाथरूम की खिड़की खोलने का प्रयास किया लेकिन शीशा लगा हुआ था और बेहोशी छाने लगी थी, इसके कारण शीशा नहीं तोड़ सके। बाथरूम में शावर खोल दिया, इससे भी राहत नहीं मिली।
खुशी ने पुलिस को किया फोन
खुशी ने पुलिस को फोन कर घर में आग लगने की सूचना दी, इसके कुछ देर बाद वह भी बेहोश हो गई। दमकल कर्मी और पुलिस पहुंच गई। आग पर काबू पाने के बाद गया प्रसाद को बाहर निकाला गया। इसके बाद प्रथम तल पर पहुंचे तो बाथरूम में डॉ. आशीष दीक्षित, प्राची, बेटा प्रणय और बेटी खुशी बेहोश थे। इन्हें अस्पताल ले गए, डॉ. आशीष को डॉक्टरों ने म्रत घोषित कर दिया।
मुंह पर लगा लें गीला कपड़ा
एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के डॉ. जीवी सिंह का कहना है कि धुआं भरने से कार्बन डाई आक्साइड सहित अन्य गैसों का स्तर उस वातावरण में बढ़नें लगता है, सांस लेने पर जैसे ही जहरीली गैसें फेंफड़ों से होते हुए ब्लड में पहुंचती हैं, इसके बाद सबसे पहले दिमाग पर असर करती हैं और बेहोश हो जाते हैं। इससे कुछ ही देर में मौत हो जाती है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि सांस लेने पर कार्बन डाई आक्साइड न जाए, इसके लिए कपड़े को पानी में भिगोने के बाद मुंह पर रख लेना चाहिए और जल्द से जल्द बाहर निकलने की कोशिश करें। बाहर नहीं निकल सकते तो छत पर भी जा सकते हैं।