आगरालीक्स…Agra News: कोई दिल की बीमारी तो नहीं है इसके लिए कौन सी जांच कराएं, आगरा में पैथोलॉजिस्ट डॉ. ऋतु गर्ग ने बताया कि दिल की अच्छी सेहत के लिए फिटनेस ही काफी नहीं बल्कि मॉनीटरिंग और मैनेजमेंट का बड़ा रोल. ( Agra News: Known about Cardiac Markers by Dr. Ritu Garg, Astha Pathology#Agra )
अच्छे स्वास्थ्य की पहली निशानी है कि आपका दिल सही लय और ताल में धड़कता रहे। पिछले कुछ महीनों में कई कम उम्र लोगों के हार्ट अटैक से गुजर जाने की खबरें सुर्खियां बनीं। इनमें से ज्यादातर न केवल फिटनेस को लेकर संजीदा थे बल्कि रेग्यूलर एक्सरसाइज या हेल्दी डाइट भी उनके रूटीन का हिस्सा थी। इसके बावजूद वे बच नहीं पाए। शहर की प्रतिष्ठित पैथोलॉजी कीं डायरेक्टर और चीफ पैथोलॉजिस्ट डॉ. ऋतु गर्ग ने भी इसे लेकर आगरालीक्स से बात की। डॉ. ऋतु ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जिनसे साफ होता है कि दिल की अच्छी सेहत के लिए केवल फिटनेस ही काफी नहीं है। इसके अलावा भी आपको कई चीजों पर ध्यान देना जरूरी होता है। आगे की बातचीत में उन्होंने कार्डियक मार्कर्स के बारे में बताया।
डॉ. ऋतु कहती हैं कि हार्ट की समस्या एक दिन में शुरू नहीं होती, ये धीरे-धीरे बढ़ती है इसलिए अगर इसका पता पहले ही लगा लिया जाए तो व्यक्ति की जान बचाना आसान हो जाता है। इसी काम में मदद करते हैं कार्डियक मार्कर्स। इसमें समय-समय पर कुछ टेस्ट कराकर इसे मॉनीटर किया जाता है। कार्डियक बायोमार्कर वे सब्स्टेंस होते हैं जो हार्ट को किसी तरह की चोट पहुंचने या उसके तनावग्रस्त हो जाने पर ब्लड में रिलीज किए जाते हैं। इन बायोमार्कर्स की मदद से एक्यूट कारोनरी सिंडोम, हार्ट के ब्लड फ्लो में कोई रूकावट, कार्डियक इस्कीमिया आदि का पता लगाया जा सकता है। इन टेस्ट की मदद से किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक की संभावना और जोखिम का पता लग सकता है साथ ही किसी ऐसे व्यक्ति की अच्छे से माॅनीटरिंग और मैनेजमेंट किया जा सकता है।
कार्डियक मार्कर क्यों महत्वपूर्ण हैं?
कार्डियक मार्कर हार्ट की गतिशीलता और स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए उपयोग किए जाने वाले बायोमार्कर हैं। ये रक्त परीक्षणों में पाए जाते हैं और हृदय संबंधी समस्याओं, जैसे कि दिल का दौरा आदि की पहचान और निगरानी में मदद करते हैं। पैथोलॉजिस्ट इन मार्करों का विश्लेषण करते हैं और हृदय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान या तनाव का पता लगाते हैं।
ट्रोपोनिन:
ट्रोपोनिन नाम का प्रोटीन ब्लड में रिलीज होता है। यह तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम (जैसे कि हार्ट अटैक) का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण है।
सीके—एमबी:
क्रिएटिन काइनेज-एमबी एक एंजाइम है जो हृदय और मस्तिष्क की मांसपेशियों में पाया जाता है। जब हृदय की मांसपेशियों को नुकसान होता है, तो सीके—एमबी ब्लड में बढ़ जाता है।
एंजियोटेंसिन-परिवर्तक एंजाइम (एसीई):
एसीई हार्ट के टिश्यूज से निकलता है। यह दिल की धड़कन को प्रभावित करता है और रक्तचाप को नियंत्रित करता है। इसका स्तर सारकॉइडोसिस में बढ़ सकता है, जो हार्ट के टिश्यूज में सूजन का कारण बनता है।
मायोग्लोबिन:
यह एक प्रोटीन है जो हार्ट की मांसपेशियों में पाया जाता है और यदि इन मांसपेशियों को कोई नुकसान पहुंचा है तो ब्लड में रिलीज होता है।
एन-टर्मिनल प्रो-बी-टाइप नेट्रियोरेटिक पेप्टाइड (एनटी—प्रो बीएनपी) और बी-टाइप नेट्रियोरेटिक पेप्टाइड (बीएनपी):
ये प्रोटीन हृदय की मांसपेशियों पर दबाव या तनाव की वजह से रिलीज होते हैं और हार्ट फेल्योर की स्थिति पर नजर रखते हैं।
एलपी-पीएलए टू:
यह ब्लड वेन्स में सूजन का एक मार्कर है और हृदय रोग के जोखिम का मूल्यांकन करने में मदद करता है।
सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी):
यह सूजन का एक मार्कर है और यह भी हृदय रोग के जोखिम का पता लगाने में मदद करता है.
कार्डियक मार्कर का उपयोग कब करते हैं
कार्डियक मार्कर का उपयोग सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई या अनियमित हृदय गति जैसे लक्षणों के कारण हृदय रोग की पहचान करने में मदद कर सकता है।
पैथोलॉजिस्ट की भूमिका
पैथोलॉजिस्ट ही उन सभी ब्लड टेस्ट का मूल्यांकन और पता लगाने का काम करते हैं। इसलिए उनकी भूमिका अहम हो जाती है। वे कार्डियक मार्करों को मापते हैं। मार्करों के स्तर में बदलाव की निगरानी करते हैं और हृदय रोग के निदान और प्रबंधन में डॉक्टरों की सहायता करते हैं। इसलिए ह्दय रोगों का इतिहास होने या सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, अनियमित धडकन जैसी स्थिति में हम ह्दय रोग विशेषज्ञों के माध्यम से पैथोलॉजिस्ट की मदद ले सकते हैं।