आगरालीक्स…जगदीश का विस्तृत स्वरूप है जगत. समाधि पार्क, सूर्य नगर मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में तीसरे दिन हुआ सती चरित्र व ध्रुव चरित्र का हुआ संगीतमय वर्णन
सूर्य नगर, समाधि पार्क स्थित श्रीमद्भागवत कथा में तीसरे दिन भगवताचार्य दिनेश दीक्षित ने प्रकृति की उत्पत्ति व विनाश का रहस्य बताते हुए कहा कि जगदीश (श्रीहरि) का ही विस्तृत स्वरूप जगत है। ईश्वर सभी में है। संसार भगवान का ही स्वरूप है। कथा में आज सती चरित्र व ध्रुव चरित्र का संगीतमय वर्णन भी किया गया। राजा परिक्षित को शमिक ऋषि के पुत्र ऋंगी कुमार द्वारा दिए गए श्राप की कथा व शुकदेव के प्रकाट्य का वर्ऩ करते हुए कलियुग में हरिनाम की महिमा बताई। कहा कि ईश्वरकी इच्छा के बिना कुछ सम्भव नहीं। कलि को राजा परीक्षित ने जब उनके राज्य क्षेत्र से बाहर जैने को कहा तह उसने चार स्थान मांगे। राजा परिक्षित ने हिंसा, मदिरा, परस्त्रीगमन व जुआ होने के स्थान के अलावा एक अच्छा स्थान देते हुए सोने (स्वर्ण) में भी कलि (कलियुग) को स्थान दे दिया।

ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि हर जीवात्मा की दो पत्नियां होती हैं। सुनीति और सुरुचि। जो नीति और नियम पर चले वह सुनीति। यानि नीति और नियम पर चलने से ही (माता सुनीति) ध्रुव जैसे पुत्र की प्राप्ति होती है। ध्रुव का अर्थ है अटल, विश्वास प्रकाश, भक्त, अलौकिक प्रकाश से चमकता सितारा। जिसके दर्शन से आयु की वृद्धि होती है। सति चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि जो सबका कल्याम करे वही शंकर हैं। राजा दक्ष ने अपने अहंकार के कारण यज्ञशाला में शिव को आमंत्रित नहीं किया। शिव तांडव से लेकर माता सति के 108 सिद्ध पीठ का भक्तिमय वर्णन किया। रविवार को श्रीराम कथा व श्रीकृष्ण जन्मोत्सव होगा।
डॉ. अखिलेश गौड़ ने दीप प्रज्ज्वलित किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. पियूष जैन, डॉ. जगत पाल, डॉ. मानवी मिश्रा, डॉ. महावीर सिंह राजपूत, डॉ. डीपी शर्मा, डॉ. सुवर्चा शर्मा, श्रद्धा दीक्षित आदि उपस्थित थे।